सेहत की बात: फूल-पौधे न केवल वातावरण, बल्कि हमारी सेहत को मजबूत बनाने में बेहद अहम भूमिका अदा करते हैं। संभवत: कुछ हद तक, लिंक हमें अपने घर के अंदर और बाहर फूल-पौधे लगाने की सलाह देते हैं। लेकिन, आज हम एक ऐसी सचाई से बने ढांचे हैं, जिसके बारे में सुनकर आपको भी यकीन नहीं होगा। यकीन मानो, यही फूल-पौधे आपके लिए कई बार गंभीर बीमारी का इलाज भी बन जाता है। यह बात आपको थोड़ी अटपटी जरूर लग सकती है, लेकिन सच है।
दरअसल, फूल-पौधों की वजह से होने वाली जिस गंभीर बीमारी के बारे में हम बात कर रहे हैं, उसका नाम है ब्रोंकाइटिस। यह बात आपके लिए थोड़ी अटपटी जरूर हो सकती है, लेकिन यह सुनने के बाद दोस्ती पर बल पड़ना भी स्वैच्छिक है। वह इसलिए भी, अभी तक जब तक हम यह ठोस घर के अंदर और बाहर फूल-पौधे के रूप में नहीं आए हैं, तब तक हमें केवल अच्छी गुणवत्ता वाले ऑक्यूरिजन मिलते हैं, लेकिन घर का माहौल भी शुद्ध होगा। लेकिन, इनमें फूल और चॉकलेट में कुछ सीज़न की चीज़ें भी मौजूद हैं, जो नकली ही अपना लुक दिखाना शुरू कर देती हैं और पहले एलर्जी, फिर ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारी की चपेट में आ जाती हैं।
फेफड़ों में सूजन के कारण हैं फूलों के पॉल्नेशन का निष्कासन
इंद्रप्रा ऑटोमोबाइल अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर पल्मोनॉस्टिक डॉ. निखिल मोदी इसके अनुसार, मौसम में बदलाव के साथ-साथ फ्लू के साथ-साथ एलर्जी भी तेजी से खत्म होने लगती है। कई बार इसकी वजह नाम की वनस्पतियों के साथ फूल और औषधियां भी होती हैं। असली, फूल और प्रमाणित में मौजूद पॉलन प्लास्टर नाम की मिट्टी के साथ सांस के रास्ते हमारे फेफड़े तक पहुंचते हैं। ह्यूमिड डेविल्स के साथ-साथ फेफड़े में भी यहां पॉलोन प्लास्टर की सूजन पैदा होती है और यही सूजन ब्रोंकाइटिस का कारण बनती है।
इन प्रारंभिक से पहचाने जाने वाले फूलों से होने वाला ब्रोंकाइटिस
डॉ. निखिल मोदी के दोस्त खराब हैं कि वायरल इंफेक्शंस में आर्किटेक्चर के साथ-साथ ग्लास होने की भी संभावना है। सर्दी और ग्लास खराब की वजह से कई बार सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिसे एलर्जी ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। ब्रॉन्काइटिस से पोटाश बैक्टीरिया को चिपचिपी बलगम वाली खांसी होती है। संसार में दिव्यता होती है। साँस में भारीपन लगता है। छाती में जमावड़ा रहता है. यदि किसी भी शख़्स में सभी लक्षण शामिल हैं तो मान लें कि वह ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हो सकता है। ध्यान दें, उस शाखा को बिना देर किए अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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किनको रखें फूल-पौधों से खास चीजें
डॉ. निखिल मोदी के अनुसार, फूलों की कीमत हर किसी को मिलती नहीं है। फूल-पौधे निश्चिन्तताउर पर हवा को साफ रखते हैं। आपकी अचूक ऑस्ट्रेलियन डेटाबेस को देखें, तो हमें पार्क में जाना बंद नहीं करना चाहिए। हां, जिन लोगों को मौसम की एलर्जी की प्रवृत्ति होती है, जिन लोगों में बदलाव के साथ सर्दी, चीकें जल्दी हो जाती हैं, उन्हें एलर्जी और एलर्जिक राइनाइटिस जैसी बीमारियां पहले से हैं, जिन लोगों के मौसम में बदलाव के साथ फूल-पौधों से छोटी दूरी बना लेनी चाहिए .
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कुछ इस तरह पॉलोन इलेक्ट्रोड फेफड़े में पैदा होते हैं इन्फेक्शन
डॉ. निखिल मोदी के अनुसार, फूलों में सुचेल्म कण होते हैं, पॉलोन अवशेष कहे जाते हैं, जो उत्पादन और विस्तार के लिए जरूरी होते हैं। पॉलन परतें छोटे-छोटे होते हैं किदिशा नहीं हैं और दुनिया के रास्ते से हम घूंट इनहेल कर लेते हैं। ये आंतरिक एलर्जिक रिलेशन उत्पादन करते हैं, जिसमें सभी ब्रोंकाइटिस के लक्षण शामिल होते हैं। अगर आप नर्मल हैं तो आपको पार्क में जाना बंद नहीं करना चाहिए। हां, अगर आपको मौसम परिवर्तन के साथ एलर्जी हो जाती है तो फूल से वापस आने वाले पॉलन के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 28 अगस्त, 2023, 12:07 IST
