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भारत में प्रत्येक वर्ष 1 से 7 सितम्बर तक ‘राष्ट्रीय सांस्कृतिक सप्ताह’ मनाया जाता है।
अनाज में आयरन, फोलेट, विटामिन सी, प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 2023: संस्थागत में हर साल 1 से 7 सितंबर तक ‘राष्ट्रीय सांस्कृतिक सप्ताह 2023’ सेलिब्रेट किया जाता है। पूरे एक सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम का मतलब लोगों को पोषण और पोषण के बारे में बताना है। भारत सरकार जागरूकता संवर्धन के लिए ‘राष्ट्रीय पोषण सप्ताह’ के दौरान दीक्षांत समारोह, शिविरों और कई कार्यक्रमों की शुरुआत करती है। असल में, काफी प्रयास के बाद भी देश में आज भी लाखों बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसका सीधा संबंध गर्भ के समय अनहेल्दी ट्रांसलेशन से है।
बता दें कि, लीगल के दौरान ज्यादातर महिलाओं के पोषक तत्वों की कमी से शरीर में आयरन, कैल्शियम की भारी कमी हो जाती है, जो मां-बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में पता चलता है कि गर्भ के दौरान पूरे 9 महीने में विटामिन, प्रोटीन और पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करें। ऐसा करने से मां तो स्वास्थ्य रहेगी ही, साथ ही जन्म के समय बच्चा भी बनेगा. उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी सही तरीकों से होगा। यदि गर्भवती महिला की अंतर्वस्तु में विटामिन, विटामिन, प्रोटीन की कमी होगी तो मां के साथ शिशु पालन भी करना होगा। आईये डॉ. बाबा साहेब मेडिकल कॉलेज की सिंगिंगएक्शन डॉ. ज्योति यादव जानें गर्भावस्था के दौरान किन-किन चीजों में शामिल होना और इन दिनों में पूजा का महत्व क्या है?
गर्भावस्था में सर्जरी का महत्व
सिंगिंगएक्शन डॉ. ज्योति यादव का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान हर महिला के लिए व्युत्पत्ति उपचार लेना बेहद जरूरी होता है। ऐसे पदार्थ लेने से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास ठीक से होता है। बता दें कि, आहार में सभी ट्राइमेस्टर में या मात्रा में पोषक तत्व शामिल नहीं होते हैं, लेकिन मात्रा में आहार लेना आवश्यक होता है। समूह के दौरान लौह से बने खाद्य पदार्थ अत्यंत मात्रा में पाए जाते हैं। मोटा, ख़ून पतला हो जाता है, तो हीमोग्लोबिन भी थोड़ा सा गिर जाता है। ऐसे में आयरन, फोलिक एसिड से भरपूर का सेवन अधिक हानिकारक हो सकता है।
व्यवसायिकरण को शामिल करना
डॉ. ज्योति यादव का कहना है कि सभी महिलाओं के लिए एक सुखद एहसास होता है, साथ ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। इस समय ली जाने वाली आपके पेट में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आप पूरे 9 महीने तक स्वस्थ रहें, तो इसमें शामिल हैं कैल्शियम, आयरन, फोलेट (फॉलिक एसिड), विटामिन सी, विटामिन बी 12, प्रोटीन, ओमेगा 3 विटामिन सी, विटामिन बी 12, प्रोटीन, ओमेगा 3 विटामिन आदि से भरपूर खाद्य पदार्थ। इसमें अवश्य शामिल करें. शरीर में इन पोषक तत्वों की खुराक होने से आप स्वस्थ रहेंगे ही, आपका शिशु भी आपके साथ रहेगा।
कुल में कौन सी चीज़ें खाना सही है
डॉ. ज्योति यादव का कहना है कि आपकी पार्टिसिपेटरी आपको कई बैचलर से बचाकर रख सकती है। ऐसे में ऑलिव संभव हो समुद्री फल, हरी पत्तीदार फैक्ट्री, ताजा घर का बना खाना प्रभावी। इसके अलावा आयरन भी बहुत जरूरी होता है. क्योंकि यह लेख ज्यादातर महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, जो उनके साथ ही उनके लिए भी घातक हो सकता है। इस कमी को पूरा करने के लिए आप हरी पत्तेदार केसरी जैसे पालक, चुकंदर, अनार, कोचिंग टूल्स, अनाज, अंडा, रेड ग्रीष्म, अमरूद आदि खा सकते हैं। वहीं, कुछ महिलाओं को कब्ज की समस्या भी होती है। इसके लिए ऑल्वेंथ अनाज जैसे सेंट्रा, लेमोनिया, रैस्पबेरीज, रेस्तरां, स्ट्रॉबेरी, अंगूर, अमरूद, चोकर युक्त आटा, साबुत अनाज आदि निश्चित रूप से उपयोगी हैं। फलों से तैयार उत्पाद। खुद को पंजीकृत करने के लिए पानी से अधिक पिएं, साथ ही साथ पानी, नारियल पानी पीने से भी आपको कई तरह के व्यावसायिक व्यवसायों की प्राप्ति होगी।
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इन शून्य को खाने से करें जिम्मेदारी
डॉ. ज्योति यादव के अनुसार, गर्भावस्था के समय का नामांकन आपके बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को दर्शाता है। लेकिन इस समय कुछ दूरी से दूरी बनाए रखना भी बेहद जरूरी हो जाता है। जी हाँ, अन्य के समय में अधिक तैलीय खाद्य पदार्थ, टोकर्ड खाद्य पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ, इलेक्ट्रानिक्स खाद्य पदार्थ, एल्कोहल, रेड मीट, अधिक ग्रेड और खाद्य पदार्थ युक्त वस्तुएँ, सड़क किनारे के खाद्य पदार्थ, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स आदि के सेवन से बचना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था में कच्ची पपीता, अनानास भी ना स्थिर। वास्तव में इन भोजनों का सेवन करने से कभी-कभी बाउल लेवल माउंट हो सकता है, जिससे मिस्केरेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
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पहले प्रकाशित : 03 सितंबर, 2023, 10:17 IST
