रामकुमार नायक/महासमुंद. अगर आप छत्तीसगढ़ के बारे में जानते होंगे तो एक बात जरूर सुनेंगे कि छत्तीसगढ़िया सबले महान.. यूं ही छत्तीसगढ़िया सबले महान नहीं कहा जाता। छत्तीसगढ़ और यहां के रीति-रिवाज का धमाका अब कलाकारों में भी देखने को मिल रही है। जी हां, लंदन की धरती पर भारतीय स्वतंत्रता की जयंती पर बड़ी ही धूमधाम से जश्न मनाया गया। जिसमें हाय..दारा लोर गेहे रे.. के साथ लाली परसा बन म फुले और मुंहा झरे रे.. ख्यातनाम छत्तीसगढ़ी हिरनों पर यहां के लोगों ने मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहवासियों के साथ नृत्य किया।
भारतीय स्वतंत्रता की याद में आयोजित विदेशी धरती के उत्सव में ध्वजारोहण करने वाले छत्तीसगढ़ियों ने एक-दूसरे को बधाई दी। मिठाईयाँ बाँटी. घटना में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और समृद्धि के हथियार, हथियारबंद हथियार शामिल हैं।
महिलाओं ने दिया संस्कृति को बचाने का संदेश
कार्यक्रम में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में संस्कृति को छोड़ने का संदेश पूरी दुनिया को दे रही है। गले में कटली मोहर, कान में खुटी, हाथ और भुजा में नागमोरी बहुटा धार और कलाई में ऐथी चुरिया, माथे पर बिंदी लगा छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति अपनी अपार श्रद्धा और प्रेम व्यक्तित्व प्रकट करती है। इस दौरान छत्तीसगढ़ी लोकगीत हाय दारा लोर गे हे रे..मुन्हा झरे रे मुन्हा झरे रे जैसे सभी कलाकारों को सुनकर सभी लोक नृत्य अपनी सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप बने थे। प्रोग्राम की शुरुआत होस्टिंग से हुई। भारतीय उच्च वास्तुकार विक्रम दोरायस्वामी ने ध्वजारोहण किया और अपना राष्ट्रगान गाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग आये थे.
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पहले प्रकाशित : 28 अगस्त, 2023, 12:06 IST
