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भारत के चावल चावल पर प्रतिबंध से दुनिया में उथल-पुथल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डैम स्काईज पर, गरीब देशों ने मदद की


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चावल के चावल पर रोक रोक भारत ने दुनिया के चावल बाजार में हलचल मचाई।
चावल चावल पर रोक से एशिया से पश्चिम अफ्रीका तक के गरीब देशों की सरकार को खतरा।
एशिया में चावल का बांध लगभग 15 वर्षों की सबसे बड़ी स्तर पर पहुंच।

नई दिल्ली. करीब छह हफ्ते पहले चावल के निर्यात पर रोक (चावल निर्यात पर रोक) ने भारत ने दुनिया के चावल बाजार (विश्व चावल बाजार) में हलचल मचा दी है। विश्व के सबसे बड़े चावल उत्पादक देश के सभी प्रकार के चावल के निर्यात पर प्रतिबंध एशिया से लेकर पश्चिम अफ्रीका तक के गरीब देशों की सरकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दुनिया के दूसरे बड़े चावल उत्पादक देशों ने चावल की बाजार को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की है, लेकिन दुनिया के चावल में मछली हलचल का नाम नहीं ले रही है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते भारत के चावल और बासमती के मिश्रण पर भी प्रतिबंध लगाने के बाद एशिया में चावल की प्रतिस्पर्धा लगभग 15 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।

चावल के बढ़ते दाम हमेशा गरीब ग्रहकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। अभी सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारत में कौन से चावल के मिश्रण पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो दुनिया में चावल की फसल 1,000 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो जाती है। चावल की सब्जी को लेकर चिंता समझ में आती है। चावल अरब लोगों के भोजन के लिए आवश्यक है। दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में लोगों की कुल कैलोरी खपत में 60 प्रतिशत का योगदान चावल का होता है। दुनिया के चावल बाजार में दाम 646 डॉलर प्रति टन है और चावल बाजार में 646 डॉलर प्रति टन का नुकसान हो सकता है।

कई चावल उत्पादकों में चावल की मार
इस वर्ष अल नीनो की शुरुआत से लेकर पूरे एशिया में कई प्रमुख चावल ओबाने वाले झील में मछलियों का खतरा है। किशोरों ने सबसे पहले 2024 की शुरुआत में गरीबों के लिए चेतावनी दी है। ऐसा लगता है कि दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक और उत्पादक चीन में चावल की फसल अब तक खराब मौसम की मार से बिक रही है। जबकि भारत के प्रमुख चावल ओबने वाले एशिया को अधिक वर्षा की आवश्यकता है। भारत के पास दुनिया में चावल चावल के उपाय कम ही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अगले साल की शुरुआत में चुनाव का सामना कर रही है। चावल और खाने के फायदे के बढ़ते दाम चुनाव में मतदाता नाराज हो सकते हैं। भारत के चावल के दाम पर रोक से देश के अंदर चावल के दाम कुछ हद तक खराब हो गए हैं।

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भारत के पास सीमित विकल्प
राजधानी नई दिल्ली में चावल की कीमत 31 अगस्त से एक साल पहले की तुलना में सबसे ज्यादा थी। मगर जुलाई में रिजॉल्यूशन पर रोक लीज के बाद 39 रुपये प्रति रिजॉर्ट पर स्थिर बनी हुई हैं। जबकि भारत के प्रतिबंध इसका असर दूसरे देशों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। सुपरमार्केट बांध में खतरनाक समूह और जनजातियों की जामखोरी की रिपोर्ट के कारण, पिछले सप्ताह फिलीपींस को पूरे देश में चावल की झील की एक सीमा पर जबरन ले जाया गया। यह देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अनाज आयातक है। इसके साथ ही अन्य दिलचस्प देश उद्यमिता से दूर अपने रह रहे हैं। गिनी ने अपने व्यापार मंत्री को भारत भेजा है। जबकि सिंगापुर, मॉरीशस और भूटान ने भारत को खाद्य सुरक्षा के आधार पर खाद्य पदार्थों से छूट दे दी है।

टैग: निर्यात, भारतीय निर्यात, बाज़ार, चावल



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