रामकुमार नायक/महासमुंद- सनातन धर्म में व्रत, त्योहार और धार्मिक आयोजनों का बहुत महत्व है। आज 25 अगस्त को सावन माह में आखिरी शुक्रवार को माँ वरलक्ष्मी का व्रत है। वरलक्ष्मी व्रत से धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है और भक्तों को धन-संपत्ति, वैभव, संत सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वरलक्ष्मी व्रत के दिन महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार की मंगल कामना करती हैं।
इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। जिन लोगों को जीवन में आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो उन्हें ये व्रत जरूर करना चाहिए। वंश वृद्धि के उद्देश्य से भी ये व्रत बहुत मूल्यवान माना जाता है। जो व्यक्ति मन से ये व्रत रखता है, उसे जीवन के उपहारों की प्राप्ति होती है और कभी भी धन की कमी नहीं दिखती।
क्या है सिद्धांत?
पंडित मनोज शुक्ला कहते हैं कि सनातन हिंदू धर्म में ही देवशयनी एकादशी होती है। चौमासा प्रारंभ होता है उसके बाद से विभिन्न प्रकार के व्रत प्रारंभ होते हैं। जैसे श्रावण के महीने में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती जी की पूजा, मां लक्ष्मी जी की पूजा पूरे भारत देश में अलग-अलग स्वरूप में की जाती है।
सुख समृद्धि…
मंगला गौरी व्रत के समान ही श्रावण माह के अंतिम शुक्रवार के दिन वरलक्ष्मी व्रत मनाया जाता है। और माँ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। इस पूजा को दक्षिण भारत के लोग सबसे ज्यादा मानते हैं। घर में सुख समृद्धि आती है और संत की कामना प्राप्त होती है। ऐसे ही श्रावण मास के आखरी शुक्रवार यानि 25 अगस्त को लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है। जिस तरह शुक्रवार को वैभव माता लक्ष्मी का व्रत होता है उसी तरह मां लक्ष्मी की अलग-अलग स्वरूपों में पूजा की जाती है। इस वर लक्ष्मी का व्रत रखने से घर में सभी तरह की मन्नते पूरी होती हैं।
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पहले प्रकाशित : 25 अगस्त, 2023, 10:22 IST
