ओपीपी/सोपानकोरबा. कोरबा के मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में छात्रों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। आलम ये है कि अब हॉस्पिटल के स्टाफ ही शेयर करते हैं खास मामलों में लोगों से मिलने वाले शॉप्स की राशि को हायर करने का कोई मौका नहीं चाहिए। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां सर्पदंश के कारण जिस बच्चे की मौत हो गई थी। उस्के कैसल को ईजीमेंट से लेकर हार्टवे तक का फास्टैग अस्पताल के स्टाफ बारगलाने में लगा था लेकिन प्रबंधन की तत्परता से स्टाफ ने अपने मनसूबो में पानी फिर से भर लिया। .
विवेचक है कि सर्पदंश से मृत्यु के मामलों में छत्तीसगढ़ में शासन की ओर से मृतकों के अंतिम संस्कार को चार लाख की सहायता राशि मिलती है। कई दफा इस राशि को प्राप्त करने की प्रक्रिया को लोग समझ नहीं पाते हैं जिसका बेजा लाभ चित्र के लोग पदनाम हैं। सहायता करने के बदले में कंपनी का मोटा नोट वसूला जाता है। पहले आउट के दस्तावेज़ इस कार्य में सक्रिय थे लेकिन अब अस्पताल के कर्मचारी ही दस्तावेज़ों की भूमिका में शामिल हो गए हैं।
पुरातनपंथी के पिता जिन्होंने स्थापत्य कला का प्रयास किया
ऐसा ही कुछ मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में देखने को मिला जहां सर्पदंश सर्पदंश के कारण जिस बच्ची की मौत हो गई थी। उनके पिता को अस्पताल के सहायक ने दस हजार रुपये की रकम देकर जल्द से जल्द सपने की बात कही। इस बात की जानकारी जिला अस्पताल पुलिस विभाग के कमिश्नर को लगी तो उन्होंने उन्हें सामाकिता की ओर से मोटी रकम वसूलने की तैयारी की है। फिर क्या था नेपोलियन के पिता ने नेपोलियन की वापसी की पूरी प्रक्रिया खुद से ही कर लेने की बात कही।
अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों को आउट आउट किया
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने उस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके काम को बाहर कर दिया है। जो कि एसोसिएट्स के पिता को बरगलाने का प्रयास था। इस मामले में ऑफिसर की भूमिका को लेकर भी कोई सहमति नहीं दी गई।
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पहले प्रकाशित : 05 सितंबर, 2023, 21:06 IST
