उत्तर
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर परमाणु बम गिरने की घटना हो सकती है।
दस्तावेज़ों में परमाणु परमाणु बम प्लाट या ना पुर्तगाल जापान का दस्तावेज़ीकरण ही किया गया था।
इस बात के प्रमाण जापान के राष्ट्रपति ट्रूमैन को भी ज्ञात थे।
6 अगस्त को हम एक बार फिर 1945 में जापान के हिरोशिमा में गिरे परमाणु बम के हादसे की माध्यमिक मना रहे हैं। दुनिया भर में मीडिया के हर फॉर्मेट में इस बात का विश्लेषण किया गया है कि वह बम कितना खतरनाक था और दुनिया किस खतरनाक मोड़ पर है और तब से अब तक परमाणु और अन्य हथियार कितने खतरनाक हो गए हैं। युद्ध की विभीषिका कितनी खतरनाक है और दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध से बचाना कितना जरूरी है। एक बहस का विषय यह भी है कि उस समय जापान पर परमाणु बम गिराना बहुत ज़रूरी था। लेकिन सच तो यह है कि इसे टाला जा सकता है।
लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है
हिरोशिमा दिवस शहीद का उद्देशय दुनिया में शांति को बढ़ावा देकर उसे कायम रखने के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही इस दिन विश्व को परमाणु संरक्षण से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया गया है, जिससे विश्व को परमाणु संरक्षण से मुक्त केलिए ठोस कदम उठाया जा रहा है। 1945 में हुआ था ये परमाणु हमला दुनिया के किसी भी शहर पर पहला परमाणु हमला हुआ था. इसमें कुप्रभाव के संकेत आज भी हिरोशिमा में देखने को मिलते हैं।
जापान पर कब्ज़ा किये बिना समर्पण
यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के हिटलर की मृत्यु का दिन यानि 30 अप्रैल के बाद 7 मई को जर्मनी के साथ ही युद्ध का अंत हो गया था। उसके बाद का युद्ध एशिया तक ही सीमित हो गया था जहाँ जापान के पीछे उद्योगों की भी शुरुआत हो गई थी। बताया जाता है कि जापान पर बिना कब्जे वाले हमलों की रणनीति के तहत परमाणु बम के इस्तेमाल पर विचार किया गया था, जिसमें बताया गया था कि बम का इस्तेमाल हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान बचाने की चेतावनी के तहत किया गया था, जिसे जापान पर कब्जा करने का समय दिया गया था। हो सकता है.
सबसे महंगा साधन?
इस दौरान जापान के भी हजारों सैनिक मारे गए। लेकिन परमाणु बम यह सब कुछ एक संकेत में ख़त्म किया जा सकता है। बताया जाता है कि युद्ध ख़त्म होने का मुख्य कारण कोई और नहीं था। लेकिन यह सब बिना परमाणु बम के भी क्या हो सकता था? लॉस एंजेलिस टाइम्स के लेख अमेरिकी और जापानी ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार, जापान से लेकर अगस्त तक के परमाणु अवशेषों को नष्ट कर दिया गया था।
हिरोशिमा का गेनबाकू डोम का इकलौता स्थापत्य शहर जो बम के हमलों से कुछ हद तक बचा था। (प्रतीकात्मक चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स)
ट्रूमैन को पता था ये बात
दस्तावेज़ में यह भी दावा किया गया है कि यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन और उनके वैज्ञानिक सलाहकार तक को मालूम थी। मित्र राष्ट्रों की ओर से बिना शर्त शर्त की मांग ने जापानियों पर हमला कर दिया था कि जापानी सम्राट, जिन्हें बहुत से लोग देवता मानते हैं, युद्ध पर शत्रुओं की तरह की याचिका दायर कर उन्हें मार दिया जाएगा। उस समय कई जापानी राजनियक का मानना था कि बिना शर्त शांति में बाधक है। यहां अमेरिका के पास खुफिया खबरें ऐसी भी आ रही हैं कि सोविटी यूनियन बर्लिन की तरह जापान में भी घुस सकती है।
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सोवियत संघ का घटक?
ट्रूमैन को पता था कि जापानी भी युद्ध ख़त्म करने के तरीके खोज रहे हैं। वे यह भी जानते थे कि सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ उतरकर उसे पूरी तरह से हरा दिया था। यहां तक कि सोवियत संघ ने 15 अगस्त की तारीख भी तय कर दी थी. जापान में सोवियत संघ के शीघ्र प्रवेश और शांति प्रक्रिया पर काम शुरू हो गया था। क्योंकि हिरोशिमा पर जापानी सेना पर बम का कोई असर नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन को पता था कि जापान में परमाणु बम गिराने का निर्णय नहीं लिया गया है। (प्रतीकात्मक चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स)
परमाणु बम से बड़ा खतरा?
लेकिन 8 अगस्त के बाद जापान की ओर से सोवियत संघ के आक्रमण के बाद, जापान के दुःस्वप्न को बढ़ाया गया और डीसी के नेशनल काउंसिल ऑफ यूएस नेवी के दस्तावेज़ों में हिरोशिमा-नागासाकी में एक लाख 35 लोगों की मौत नहीं हुई। के बराबर ही असर हुआ था. लेकिन जापान पर कम्युनिस्टों का कब्ज़ा उनके लिए था।
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बहुत से अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि परमाणु बम सैन्य रूप से या तो गैर जरूरी है या नैतिक रूप से निन्दनीय है या फिर दोनों ही है। खुद ट्रूमैन के चीफ ऑफ स्टाफ ने एक लिखित दस्तावेज में कहा कि “.. युद्ध में जापान के परमाणु बम का कोई फायदा नहीं हुआ था।” जापान पहले हार चुका था और दान के लिए तैयार था। लेकिन ट्रूमैन नहीं माने और इतिहास कुछ और हो गया।
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पहले प्रकाशित : 06 अगस्त, 2023, 06:53 IST
