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जापान चंद्रमा मिशन जल्द ही छोटे आकार के लैंडर के साथ लॉन्च किया जाएगा


उत्तर

जापान के चंद्रमा के लिए यह यान पिछले महीने प्रक्षेपित होने वाला था।
सीज़न के ख़राब होने के कारण इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई थी।
केवल 200 ग्राम वजन का यह लैंडर खास तरह का अवतरण है।

भारत का चंद्रयान-3 अभियान पूरा हो चुका है। इस अभियान में विक्रमलैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित सॉफ्ट सॉफ्ट माउंट की और नए अभिलेख भारत का नाम दर्ज किया। इसके बाद दोनों ने चंद्रमा की सतह पर सभी प्रयोग सफलता डेक्स पूरे किये और बहुत से महत्वपूर्ण दस्तावेज पृथ्वी पर एकत्रीकरण को भेजा। अब जापान भी एपिसोड में अपना नाम जोड़ने वाला है। आगामी 7 सितंबर को वह एक मून अभियान के लिए प्रक्षेपित करने जा रही है जिसके माध्यम से वह एक छोटे से रोवर मून की सतह पर छापा मारने वाली है। इसकी खास बात यह है कि यह विशेष प्रकार की पिनप्वाइंट लैंडिंग होगी जो एक ढलान वाली सतह पर होगी।

कौन सा प्रॉडक्ट
जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्री (एमएचएआई) ने घोषणा की है कि वह एच-आइए रॉकेट के मून के माध्यम से एक लैंडर को प्रोजेक्ट करने जा रही है। इसे ऐसे समय पर जारी किया जा रहा है जब पिछले महीने हवा के प्रतिकूल प्रभाव के कारण इसकी आलोचना की गई थी। एचएमआइए डिजाइन जाक्सा और एचएचआई टीम ने 2001 से जापान के स्पेस लॉन्च किए गए प्रोजेक्ट्स की तरह काम किया है।

इसका प्रक्षेपण कब होगा
गौर करने वाली बात यह है कि मई महीने में भी इसी तरह का एक लॉन्च का प्रयास हुआ था जो असफल हो गया था। इसका प्रक्षेपण जापान एरोस्पेस एक्स्प्लोरेशन एजेंसी जाक्सा के दक्षिणी जापान में तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से भारतीय समय 7 सितंबर को सुबह 5.12 बजे किया गया है। जबकि इसका संस्करण 15 सितंबर तक उपलब्ध है।

एक बड़ी सफलता होगी
एचओसीओ डिज़ाइन के बारे में बताया गया है कि 46 में 45 लॉन्च पूरी तरह से सफल रहे थे। लेकिन एचएआई की 47वीं रिलीज को कई महीनों तक टाला गया। लेकिन आगामी वाला प्रक्षेपण जापान की मून पर पहली लैंडिंग होगी जिसके बाद जापान मून पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पांचवा देश बन जाएगा।

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जाक्सा अपने देश की निजी कंपनी के सहयोग से यह पूरा अभियान चलाना चाहता है। (प्रतीकात्मक चित्र: विकिमीडिया कॉमन्स)

क्या है मकसद
स्लिम यानी स्मार्ट लैंडर चंद्रमा की जांच के लिए बहुत छोटा यान होगा जिसका वजन केवल 200 ग्राम ही होगा। जबकि भारत के चंद्रयान-3 का वजन 1750 किलोमीटर था। स्लिम का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर 100 मीटर के आसपास के क्षेत्र में रणनीतिक प्रक्षेपण करना है।
अभियान का उद्देश्य यह दर्शाया गया है कि चंद्रमा पर जहाँ भी खंजर उतरा जा सकता है।

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मित्रता की आवश्यकता
जाक्सा का कहना है कि वह इसके लिए पिनप्वाइंट लैंडिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि साइट का सबसे खुला प्रवेश संभव हो सके। जाक्सा का कहना है कि आज के तकनीकी ज्ञान अनुसंधान, खगोलीय लक्ष्य को संभव बनाया जा सकता है और इसमें बुनियादी आधारभूत संरचना भी आवश्यक है।

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इस अभियान में जाक्सा पिन गंतव्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहते हैं। (प्रतीकात्मक चित्र: Pixabay)

ढलान वाली समुद्रतट पर लैंडिंग
जाक्सा का कहना है कि पिनप्वाइंट लैंडिंग अचीवमेंट कर ऐसे साइन पर लैंडिंग संभव हो सकती है जहां चंद्रमा से भी कम संसाधन हैं। सुलैमान के लिए प्लांटेड प्लांट मून के स्थानीय इलाके में शिहोली नाम के छोटे क्रेटर के पास है। क्रेटर के पास से उतरने वाले क्षेत्र की सतह 15 डिग्री ढलान पर होगी। ऐसे में ढलान वाली सतह पर यह लैंडिंग और भी अहम हो जाती है।

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इस अभियान की सफलता जापान अंतरिक्ष उद्योग के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी। जाक्सा को वित्तीय वर्ष 2024 के ले वहां की सरकार से 10 अरब येन की सब्सिडी मिल सकती है। इस अनुरोध का उपयोग एसोसिएट और यूनिवर्सिटी को सैटेलाइट और चंद्रमा प्रौद्योगिकी के विकास के लिए दिया जाएगा। भारत के चंद्रयान-3 की सफलता के बाद यह अभियान भी चंद्रयान-3 कार्यक्रम में गति का काम करेगा।

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