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ना घर बचा-ना ज़मीन: राहत शिविर में कट रही 8 महीने की नाबालिग की जिंदगी, अगले महीने है मस्जिद


मंडी. हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन ने कइयों को बर्बाद कर दिया है. बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके पास तन पर ढके कपड़े हैं और कुछ भी नहीं बचा है। यह लोग अब प्रशासन की ओर से दी गई राहत शिविरों में दिन काट रहे हैं। मंडी जिले में राहत शिविरों में दिन काट रहे लोगों में एक महिला भी ऐसी है, जो 8 महीने की गर्भवती है। यह महिला रिवाल्सर के पास कलकर स्कूल में राहत शिविर में रहने को मजबूर है। महिला का नाम है डेमोक्रेटी. अविश्वासी और उनके पति ओम दत्त का घर गुम्हू गांव में था, जो 13-14 अगस्त को आई त्रासदी में डूब गया था। इस परिवार के पास तन पर ढके कपड़े के सिवाए और कुछ भी शेष नहीं है।

मनोविज्ञानी 8 माह की गर्भवती है और अगले महीने की 11 वर्ष की आयु में इसकी समाप्ति की तारीख है। यह मनोविज्ञानी का पहला बच्चा है। ऐसी स्थिति में जहां मनमोहनी को देखभाल और बेहतरीन पोषाहार की जरूरत थी, वहीं वो स्कूल के एक कमरे में अन्य लोगों के साथ जीवन काटने को मजबूर है। डॉक्टर के पति ओम दत्त को संदेह है कि कहीं उनकी पत्नी की पढ़ाई स्कूल में ही न हो जाए।

साथ ही यह भी चिंता सता रही है कि अगर मदरसा अस्पताल में भी हुई तो उसके बाद उन्हें भी अपने नवजात को लेकर स्कूल में ही आना पड़ेगा। क्योंकि ना घर बचा है और ना ही ज़मीन। ऐसे में वो खुद का अपने नवजात शिशु का ध्यान कैसे रखेंगे। अज्ञात सरकार से मदद की दुकान मिलती है। ओम दत्त और अर्थशास्त्री का कहना है कि सरकार जल्द से जल्द जमीन और घर में उपलब्ध हो जाए, ताकि विपदा के इस दौर में ये अपनी जिंदगी सही ढंग से जी सके।

टैग: हिमाचल पुलिस, हिमाचल प्रदेश भूस्खलन, मंडी शहर, शिमला न्यूज़ टुडे



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