रामकुमार नायक/महासमुंदः छत्तीसगढ़ में पोला उत्सव खेती-किसानी से जुड़ा त्योहार है। खेती किसानी का काम ख़त्म हो जाने के बाद भाद्र पक्ष की सब्जियों को यह त्यौहार मनाया जाता है। पोला उत्सव के बारे में ऐसा कहा जाता है इसी दिन अन्नमाता गर्भ धारण करती है. धान के प्रमाणित में इस दिन दूध भरा जाता है। इस दिन लोगों को खेत जाने की आदत है.
पोला उत्सव कैसे मनाया जाता है
पोला पर्व महिलाएं, पुरुषों और बच्चों के लिए अलग-अलग महत्व है। इस दिन हर घर में खास सजावटी सामान बनाए जाते हैं। इन वाद्ययंत्रों को मिट्टी के बर्तन कहा जाता है, खिलौनों में पूजा करते समय भरते हैं, ताकि पोथी हमेशा अन्न से भरा रहे। बच्चों को मिट्टी के गोले के खिलौने मिलते हैं। पुरुष पशुधन को सजाकर पूजा करते हैं. छोटे-छोटे बच्चे भी मिट्टी के बैलों की पूजा करते हैं। मिट्टी के बैलों को लेकर बच्चे घर-घर जाते हैं जहाँ उनकी दक्षिणाएँ होती हैं।
पोला उत्सव का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि पोला का यह पर्व अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इस दिन नंदी बैल की पूजा की जाती है। छत्तीसगढ़ में यह व्रत बड़ी फैक्ट्री से मनाया जाता है। पोला का पर्व भादों माह के कृष्ण पक्ष की वनस्पति तिथि को मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के किसान अपने खेती किसानी की बोवाई और निंदाई के कार्य के बीच में समय साझा कर सकते हैं ये व्रत कैसे करते हैं. किसान भाई गोधन पशुधन के अलावा कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। इस दिन ऐसा कहा जाता है कि इस दिन धान की बोवाई के बाद सॉक किया गया से दूध भरना आरंभ होता है। इस दिन छत्तीसगढ़ परंपरा के अनुसार गर्भ पूजन भी किया जाता है। हमारे क्षेत्र के ग्रामीण किसान इस दिन खेत नहीं जाते और परिवार के साथ इस त्यौहार को मनाते हैं। बैलों को नहलाकर उनकी पूजा करते हैं।
अन्य में ठेंथरी खुरमी मशहूर है
पंडित मनोज शुक्ला ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ के इस पारंपरिक त्योहार में कई अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, ठेंथरी खुरमी बिच्छू भोग विलास है। किसानों के ओर से बच्चों को संस्कार और संस्कृति से जोड़ना मिट्टी के बैल, चूल्हा आदिसामग्री के लिए दिए गए हैं।
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पहले प्रकाशित : 14 सितंबर, 2023, 13:00 IST
