रामकुमार नायक/महासमुंद. सनातन धर्म के अनुसार वर्ष भर में हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत मनाया जाता है। माना ये होता है मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन समाप्त होता है। साथ ही सुख-समृद्धि बनी रहती है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूर्ण श्रद्धा के साथ-विधान से पूजा की जाये, तो सभी कष्टों से मुक्ति है। अगर आपके दाम्पत्य जीवन में कोई समस्या आ रही है, तो इस दिन करें महादेव और माता पार्वती की पूजा।
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल दिव्य स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद में मंदिर में दीपक व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद दूध और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक अत्यंत प्रिय है। रात्रि के समय भगवान शिव की रुद्र का अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के दौरान ॐ नमः शिवाय इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए, इसके बाद शिवजी बेलपत्र पर, भांग, धतूरा आदि निक्की कर का समापन शिवजी की आरती के साथ पूजा का समापन होना चाहिए।
शिव की आराधना करने पर पूर्ण मनोभाव
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि मासिक शिवरात्रि इस तिथि को हर माह के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी और चतुर्दशी के मध्य रात्रि को मास शिवरात्रि कहा जाता है। वर्ष में पन्द्रह मास शिवरात्रि होती है, और बारहवां महामहिम है. यह पूर्ण शिवरात्रि भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। शिवजी की पूजा आराधना से हर तरह के मन की प्रस्तुति होती है। भोलेनाथ को जलाभिषेक अत्यंत भगवान को पसंद है, इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक किया जा सकता है।
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पहले प्रकाशित : 13 सितंबर, 2023, 12:59 IST
