रामकुमार नायक/महासमुंद छत्तीसगढ़ में इन दिनों त्योहारी सीजन चल रहा है, एक के बाद एक त्योहार और व्रत आ रहे हैं। पति की दीर्घायु जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का पर्व हरितालिका अर्थात तीजा सोमवार है 17 सितम्बर 2023 मनाया गया. महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं। इससे पहले रविवार रात महिलाएं करू भात ने अपना व्रत शुरू किया।
क्या होता है करू भात
छत्तीसगढ़ी में दादा का मतलब ‘करू‘ होता है और चावल उगता है ‘भट‘ कहा जाता है. इस व्रत पूजा से एक दिन पहले शाम के समय भोजन में करेला की सब्जी भात का भोग, रोटीगी और खेड़ा खीर सोंगी, ताकि अन्न की डकार न आये. इसके बाद कुछ भी लाइसेंस नहीं है. इस दिन छत्तीसगढ़ के हर घर में बनी है सब्जी की सब्जी।
तीजा पर व्रत कैसे रखा जाता है
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व पर करू (कड़वा) भात खाने की परंपरा है। तीजा व्रत रखने के एक दिन पहले करू भात खाया जाता है। करू भात का प्रकृति है कि करेले की सब्जी उस दिन भोजन करती है। ऐसा होता है कि दूसरे दिन जब निर्जला व्रत रखा जाता है तो उस दिन कड़वा करेला शरीर में एक प्रकार से तरल पदार्थ को अलग कर देता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, इसलिए छत्तीसगढ़ में परंपरा है कि बहन-बेटियों को करेला सब्जी बनाकर भोजन कराया जाता है। यह करू भाट के नाम से अनुकरणीय है।
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका के दो शब्द हरत और आलिका से मिलकर बने हैं। हरत का अर्थ सत्य और आलिका का अर्थ साथी है। हरतालिका तीज की पृष्ठभूमि में माता पार्वती के जीवन की एक कथा है। कहते हैं कि माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन देवी पार्वती को शिव प्रिय थे। तब उनकी सहेलियों ने पार्वती जी को महल से ले जाकर, एक गुफा में छिपा दिया। वहां माता पार्वती ने कठोर तप से भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त किया।
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पहले प्रकाशित : 18 सितंबर, 2023, 09:26 IST
