Homeदेशमहिला आरक्षण विधेयक: महिला नक्सली कम्युनिस्ट पार्टी कब से लागू होगी, कब...

महिला आरक्षण विधेयक: महिला नक्सली कम्युनिस्ट पार्टी कब से लागू होगी, कब आरक्षण होगा खत्म?


उत्तर

पहली बार 1996 में लैपटॉप एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने महिला नाइट बिल पेश किया था।
साल 2010 में गद्दाफी सभा ने महिला नागालैंड में कर दिया, लेकिन सोनम में कोई नहीं हो पाया।
लॉ मिनिस्टर अर्जुन राम मेघवाल ने 19 सितंबर 2023 को फीमेल नैट बिल मोशन पेश किया है।

महिला आरक्षण विधेयक: केंद्र सरकार की ओर से आज यानी 19 सितंबर 2023 को नए संसद भवन में पहला समुद्र तट महिला नारियल बिल पेश किया गया है। विधान सभा के राम विधान सभाओं में कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने महिलाओं को 33 प्रतिशत विधान सभाओं में यह विधेयक पेश किया। इस बिल पर कल यानि 20 सितंबर 2023 को कॉम में चर्चा होगी। सरकार का दावा है कि कल ही कंपनी पर चर्चा के बाद इसे भी मंजूरी दे दी गई। अब सवाल यह है कि अगर सरकार की योजना के अनुसार ये बिल कल से जारी हो जाता है तो 2024 में होने वाले नामांकन में 181 संसदीय क्षेत्र की महिला योजनाओं के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी?

महिला नॉचियन को केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को ही मंजूरी दे दी थी। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाली महिला नटखट ज्वालामुखी वर्ष 1996 में पहली बार संसद में पेश हुई थीं। इसके बाद इसे साल 1998 और 1999 में भी पेश किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। फिर 2008 में भी महिला नामी गिरामी की मूर्ति बनाई गई। इस बार भी बिल पास नहीं हुआ। फिर 2010 में साओजामा ने 108वें संशोधन लाउंज को आम तौर पर पास कर दिया। हालाँकि, उस समय कुछ सुपरमार्केट के विरोध के चलते ये बिल पारित नहीं हो पाया था।

ये भी पढ़ें- महिला आरक्षण बिल: खाली सरकार ने 4 बार की कोशिश, अचानक पलटी मार गए थे नीतीश कुमार

ये है महिला लोकतंत्र?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने संसदीय भवन में अपने अंतिम भाषण में कहा था कि संसद के दोनों सदनों में अब तक 7,500 से अधिक जन निवास अपने आश्रम बना चुके हैं। लेकिन, इनमें महिला उद्यमियों की संख्या महज 600 रही है। महिलाओं के योगदान ने सदन की गरिमा को हमेशा बढ़ाने में मदद की है। तब कायस लेआउट में कहा गया था कि मोदी सरकार की संसद में महिलाओं को 33 फीसदी हिसादारी वाली महिला का नाम शामिल है। बता दें कि पहली बार 12 सितंबर 1996 को एचडी देवगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन का आह्वान किया था, जो मुख्य रूप से इस संसदीय विधेयक में पेश किया गया था। हालाँकि, टैब सर्टिफिकेट नहीं हो पाया।

यह क्या था इस सुपरमार्केट में?
महिला नासिक में संसद और राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी नटखट का प्रस्ताव रखा गया था। बिल में यह प्रस्ताव रखा गया था कि हरनोमो चुनाव के बाद आर्किटेक्चर को फिर से शुरू किया जाना चाहिए। एंटरप्राइज़ राज्य या केंद्रशासित चुराए गए के अलग-अलग-अलग-अलग हिस्सों में स्टॉक के माध्यम से प्रवेश किया जा सकता है। बता दें कि बैंकों और नगर पालिकाओं में स्थिर समय में 15 लाख से ज्यादा हिस्सेदारी वाली महिला प्रतिनिधि हैं, जो करीब 40 प्रतिशत होती हैं। वहीं, विपक्ष और विपक्षियों के विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं की उपस्थिति काफी कम है।

ये भी पढ़ें-विश्लेषण: क्यों इतनी खराब स्थिति में पहुंचे भारत और कनाडा के रास्ते

कानून कब बनेगा लागू?
अगर 20 सितंबर 2023 को महिला नामांकन में नामांकन हो जाता है तो इसे भी नामांकन 2024 में लागू करना मुश्किल है। 50 प्रतिशत विधानसभाओं से कम से कम 50 प्रतिशत विधायकों को संसद से पारित करने के बाद महिला सदन को मंजूरी देनी होगी। वहीं, 2026 के बाद परिसीमन का काम भी होना है। कानून बनने के बाद भी इसे लागू किया जाएगा। ऐसे में महिला लोकसभा चुनाव 2029 लागू हो सकती है. अब सवाल ये है कि क्या कानून बनने के बाद 33 प्रतिशत महिला नटखट कब तक लागू रहेगी? बता दें कि संविधान सभा और विधान परिषदों में महिला शून्य लागू नहीं होगा।

ये भी पढ़ें- शांति निकेतन का चीन कनेक्शन क्या है, एक चीनी नागरिक ने बताई कैसे आर्थिक मदद

कितने समय तक ताज़ा ताज़ा?
साल 1996 में जब इस कारखाने का आविष्कार किया गया था, तब इसके प्रस्ताव में क्लिनिकल डिस्कशन में साफ तौर पर लिखा था कि इसे सिर्फ 15 साल के लिए ही लागू किया जाएगा। इसके बाद इसके लिए फिर से ज्वालामुखी संसद के दोनों सदनों को मंजूरी देनी होगी। अब सवाल यह है कि अगर ये मैकेनिकल कानून बन गया तो इसकी 15 साल की अवधि कब से शुरू होगी? कानून विशेषज्ञ के अनुसार, महिला नवीन की 15 वर्ष की अवधि में इसे लागू होने के बाद से ही शुरू किया जाएगा। अगर ये 2029 में लागू होता है तो ये 2044 तक लागू रहेगा। इसके बाद डेमोक्रैटिक संसद में लाना और पूरी प्रक्रिया से गोवा होगा।

लागू हो रहा है अचल संपत्ति अनुपात?
महिला नॉमिनेशन लागू के बाद लोकसभा में संसद के अंतिम सत्र में कम से कम 181 महिला सांसद तो शामिल है ही। विपक्ष में महिला कलाकारों की भागीदारी 15 प्रतिशत से भी कम है। इस समय में 78 महिलाएं न्यूनतम ही हैं। अगर पेरिसिमन के बाद संसद रेज़्यूमे की प्लीहा है तो फीमेल मंज़िल की रेज़्युमे में भी फ्रैक्चर होगा। अगर सहयोगियों की बात की जाये तो स्कीटर विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधि सिद्धांत 15 प्रतिशत से भी कम है। वहीं, कई उत्पादक विधानसभाओं में तो महिलाओं की हिसादारी 10 फीसदी से भी कम है। देश के सिर्फ 19 जिलों में महिलाओं की भागीदारी 10 फीसदी से कम है।

ये भी पढ़ें- भारत के धार्मिक संप्रदाय जिनमें साधु महिलाओं को भी नहीं देख सकते, बात करना तो दूर

अलग से लक्ष्य एससीएच-एसटी नवीनीकृत?
बिजनेस में एससी और एसटी नटखट लागू है। लेकिन एससीएसटी-एसटी महिलाओं को अलग से कोई खतरा नहीं है। महिला शोरूम को कोटा में कोटा मिलेगा। आसान भाषा में कहा जाता है तो विपक्ष और अधिवासी जिलों में SC-ST वर्ग के लिए पहले से ही आर्काइव रिक्वायरमेंट में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। ऑब्जेक्टिव में 47 ऑब्जेक्टिव एसटी और 84 आर्किटेक्चर वर्ग के लिए ऑब्जेक्ट हैं। संसद की अंतिम स्थिति के आधार पर कहा जा सकता है कि 16 लार्ज एसटी और 28 लार्ज एससीएच वर्ग की महिलाओं के लिए कानून बनना जरूरी है। बता दें कि अविश्वास में अमूर्त वर्ग के लिए नैतिकता की कोई विचारधारा नहीं है। इसके अलावा वे महिलाएं भी चुनावी मैदान में उतर सकती हैं, जिनके लिए नामांकन नहीं है।

टैग: लोक सभा, लोकसभा चुनाव 2024, संसद सत्र, पीएम नरेंद्र मोदी, राज्य सभा, आरक्षण, महिला सशक्तिकरण



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img