राजकुमार/रायपुरः गणेश चतुर्थी को बड़े ही धूम धाम से पूरे देश में मनाया जाता है। हर जगह-जगह गणपति बाबा के अनमोल साज चल रहे हैं। वहीं भगवान गणेश की मूर्तियां भी भारी मात्रा में बनाई जाती हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक मूर्तिकार की कहानी सुना रहे हैं, जो शरीर से क्वांटम के बावजूद दृढ़ मन से होने वाला अपना भूखा दिख रहा है। यह मूर्तिकार हीरालाल चक्रधारी हैं, जो महासमुंद जिले के लालपुर, बागबाड़े में रहते हैं. हीरालाल शरीर से अयोग्य हैं, लेकिन इसके बावजूद वे टिकाऊ नहीं हैं और खनिजों के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाते हैं।
22-23 प्राचीनतम से बनी हुई मूर्तियाँ
हीरालाल ने बताया कि लगभग 22-23 प्राचीन काल से वो मूर्तियाँ बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने संकल्प को अपने जीवन का आधार बनाया है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश के साथ-साथ अन्य प्रदेश में भी मूर्ति निर्माण का ऑर्डर मिल रहा है। वहीं मूर्तिकार हीरालाल ने बताया कि उनके परिवार की अजीविका का ही रूपांतरण है। उत्सव में वो अभी गणेश जी की मूर्तियां बना रहे हैं। ज्वालामुखी की कलाकृतियाँ, छत्तीसगढ़ के अलावा भी है।
हीरालाल लोगों के लिए बने प्रेरणा
गणेश चतुर्थी के बाद वो दुर्गा माता की मूर्तियां चिली। वहीं के लिए लक्ष्मी माता की मूर्तियां और भी देखें। साल भर वह मिट्टी की मूर्तियां बनाने का काम करती है। हीरालाल ऐसे कई लोगों के लिए प्रेरणा बने हैं, जो सोचता है कि वो जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता। हीरालाल होने के बावजूद भी कभी हार न मानें तो आप भी हार मत मानिए और करो कुछ ऐसा कि लोग करना चाहते हैं आपके जैसा।
.
पहले प्रकाशित : 19 सितंबर, 2023, 15:19 IST
