नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) ने अपने फैसले में कहा कि किसी कर्जदार को ‘किसी भी समय’ का भुगतान किया गया है, उसकी गिरवी संपत्ति की नीलामी पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि कोई ऋणदाता गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की वैधानिक नियंत्रण करने वाले कानून के तहत नामांकन नोटिस के प्रकाशन से पहले वित्तीय शेयरधारकों का ऋण चुकाने में असफल रहता है, तो वह अपनी गिरीवी संपत्ति को पूंजीपति बनने का जोखिम नहीं उठा सकता है। हो सकता है.
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, ‘इस अदालत का कर्तव्य है कि वे पूर्व में हुई नीलामी की शुचिता की सुरक्षा करें। ‘अदालतों को प्रदर्शन में हस्तक्षेप करने से गुरेज करना चाहिए, अन्यथा यह मुकदमे के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा और इसमें जनता के प्रदर्शन और भागीदारी को बाधित करना चाहिए।’ शीर्ष अदालत वित्तीय परिसंपत्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्संरचना और सुरक्षा हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (सरफेसी अधिनियम) के एक प्रस्ताव से लागू हो रही थी।
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जस्टिस पारडीवाला ने 111 खण्डित का निर्णय सुनाया
अधिनियम की धारा 13(8) गिर में प्रावधान है कि किसी भी ऋणदाता सार्वजनिक नीलामी के लिए अधिसूचना की तारीख से पहले यावी संपत्ति की आवंटन या बिक्री के माध्यम से स्थानांतरण के लिए निविदा आमंत्रण करने से पहले पूरी तरह से दैनिक राशि का भुगतान करके किसी भी तरह से अपनी गिरवी संपत्ति वापस मांग सकते हैं। जस्टिस पारडीवाला ने 111 डिसऑर्डर का निर्णय लिखा।
…उनकी अपनी गिरीवी प्रॉपर्टी का अधिकार समाप्त हो जाएगा
उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि सरफेसी एक्ट की कंडीशन धारा 13(8) के अनुसार, एक बार जब ऋणदाता सूची नोटिस के प्रकाशन से पहले ऋणदाता को भुगतान और शुल्क के साथ मित्र राशि की पूरी राशि की आपूर्ति विफल रहती है तो 2002 के ‘आठ के समाचार पत्र’ में ‘आठ के अभिलेख’ के प्रकाशन की तिथि पर उनके अपने अनुसार गिरवी संपत्ति का अधिकार समाप्त हो जाएगा।’ यह फैसला बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली सेलिर एल रिव्यू की अपील पर आया। उच्च न्यायालय ने एक अन्य कंपनी बाफना मोटर्स (मुंबई) प्राइवेट लिमिटेड को बैंक को प्रॉडक्ट पेमेंट पर गिरीवी प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी की मंजूरी दी।
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पहले प्रकाशित : 21 सितंबर, 2023, 23:48 IST
