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मोटा है आपका मसाला, थक जाता है जल्दी? तो छुपी हो सकती है ये गंभीर बीमारी, डॉ. एसवी मधु बता रहे लक्षण


उत्तर

मोटूट होने वालों में पीन्यूवर्टी एज में टाइप-2 सिगरेट के मामले बढ़ रहे हैं।
रिसर्च में दावा किया गया है कि टाइप टू वॉर्स से ग्रॉस्ट 85 प्रतिशत असेम्बली ओवरवेट के भी शिकार हैं।

बच्चों में टाइप-2 मधुमेह: भारत में विद्यार्थियों में मोटापा अच्छा माना जाता है। अगर मोटापा होता है तो उसे बोल्टेज और सुंदर कहा जाता है, यही वजह है कि मोटे प्रतिभागियों का वजन बढ़ाने के लिए उसके माता-पिता के पैरों में एड़ी की चोटी का जोर लगाया जाता है, जबकि मोटे प्रतिभागियों को स्केलेटन करने के लिए शायद ही ऐसा करना होता है। लेकिन आपकी ये धारणा आपके लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो सकती है। आपकी स्थिति में एक ऐसी गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है जिससे जीवन भर इन्सुलेटर पाना मुश्किल हो जाता है।

नई फ़िल्फ़िया के जीटीबी हॉस्पिटल (जीटीबी हॉस्पिटल) में सेंटर ऑफ़ नर्सिंग, एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म माँ के नामडी प्रोफेसर एस.वी. मधु कहते हैं कि पिछले कुछ दशकों से जोड़ों में ही नहीं बल्कि बड़ों में भी मोटापा खतरनाक हो रहा है। यदि इंफेक्शन के साथ कुछ निश्चित लक्षण भी दिखाई देते हैं तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

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डॉ. मधु का कहना है कि शेफ की वजह से होने वाली ये गंभीर बीमारी है टाइप-टू मरीज। लाइफस्टाइल खराब दवा की वजह से होने वाली ये बीमारी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर देती है। जो उम्रदराज छात्र-छात्राओं के बीच खाना पीना और खेलना शुरू कर देता है, वह इलाज और साख के बीच में झूलता रहता है। कुछ दिन पहले आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मोती प्रतिभागियों में टाइप-2 मोटापा होने की संभावना भी जताई जा रही है, ऐसे में मोती मंडल में 85 प्रतिशत छात्र ओवरवेट या मोटापा एक सामान्य कारण है।

मसूड़ों के साथ ये लक्षण हैं खतरे की घंटी
अगर संगतों में किसी निश्चित लक्षण के बारे में पता चले तो आप समझ जाएं कि संगतों की बीमारी के बारे में क्या तैयारी की जा रही है। इन दस्तावेजों में से किसी एक को देखें और तुरंत पेस्टल के शुगर लेवल की जांच करें।
. बार-बार पेशाब आना या पेशाब का बिना पता चले निकल जाना।
. बहुत थकान होना.
. बार-बार प्यास लगना और पानी पीने के बाद फिर से प्यास लगना
. संक्रमण या बुखार का बार-बार होना।
. आँखों में मस्‍त होना
. भूख लगना.

इस उम्र में हॉस्टलों में रहती हो रही टाइप-टू वर्कर्स
गंगाराम हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन एस्टिाल्यूशन के डॉक्टर डॉ. अभिषेक डी आर्य बताते हैं कि प्यूवर्टी एज में टाइप-2 साल के बच्चे यानी 8 से 12 साल की उम्र में सबसे ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इस उम्र में अगर आपका असेटा एफ़एफ़ से ग्रॅस्ट है तो असामज्य अटेस्टमेंट के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। वहीं अगर ऐसी स्थिति हो तो बच्चों में ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना दोगुनी हो जाती है।

न बढ़ते हुए आइटमों का वजन
डॉ. एसवी मधु का कहना है कि सामानों का वजन बढ़ना खतरे से खाली नहीं है। जैसे-तैसे व्यवसायियों को बीमारी से बचाना है तो व्यवसायियों को व्यवसाय-कूदने दें। रोज़ और असायाम शबाब। वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ कम से कम खाने के लिए। प्रतिदिन में मिलेट, चिप्स, साबुत अनाज और नट्स शामिल होते हैं। मैदा से बने ऑइली खाद्य पदार्थ खाने के लिए नहीं।

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