मोहित/ट्रेनर शाजापुर.शहर में जानवरों के साथ ही जानवरों की आबादी भी सड़कों पर देखने को मिलती है। जो आक्रामक रूखे अपनाते हुए शहरवासियों के लिए संकट बने हुए हैं। जो कई लोगों पर व्यापारी भी हो चुके हैं. लेकिन अपने काटे के टुकड़े पर कई लोग देशी इलाज कर इस तरह होने वाले को उखाड़ने से भी बाज नहीं आए। लेकिन ऐसी अनदेखी कई बार भारी भी पड़ सकती है। यहां तक कि चाकू के टुकड़े से जान का खतरा भी हो सकता है।
कुत्ते काटने वाले के बाद अलग होते हैं
कई बार लोग अपना टैटू के टुकड़े पर देशी इलाज सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। लोगों का कहना है कि रैबिज का इंजेक्शन लगाना से अच्छा है वे घरेलू ईलाज अपनाएं। लेकिन रामबाण की माने तो यह इलाज 100 में से एक बार ही काम आता है। इसके अलावा अगर किसी चीज के दातों में जहर लग जाए अगर शहर में प्रवेश किया जाए, तो इससे जान का खतरा भी हो सकता है।
रैबिज स्कूल पर यह हो सकता है दुष्परिणाम
कई बार देखने में आता है कि कोई व्यक्ति कुत्ते के काटने वाले को उसके शरीर में ले जाता है और घाव कहां होता है। इसमें चॉकलेट या अन्य उपचार अपनाता है, लेकिन यह बिल्कुल नहीं है। आर.डी.ओ. सचिन नायक ने बताया कि यदि रैबिज फेल हो जाता है तो यह व्यक्ति काफी घातक साबित हो सकता है और व्यक्ति पागलों जैसी हरकत करने लगता है। वह पानी से भी डरने लगता है. इसके अलावा कई तरह की बीमारियां भी उसे घेर सकती हैं और अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
यह करें कुत्ते काटने वाला
डॉ. नायक का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को कुत्ता काटा जाए तो सबसे पहले उसे अस्पताल में इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने भी बड़े पैमाने पर लेबल जारी कर लाखों की संख्या में लोगों को टीका लगाने का आदेश दिया है ताकि उन्हें समय पर ठीक किया जा सके। इसके अलावा कभी भी देशी उपचार की पुष्टि नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे जान का खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के अस्पतालों में भी लोगों का इलाज किया जा रहा है।
अस्पताल में भी बढ़ रहे रॉकेट के काटने का मामला
अगर दो महा के आंकड़ों की बात की जाए तो जिला अस्पताल में जुलाई से अगस्त में करीब 194 मरीज आ चुके हैं।जिन्हें रैबिज का कमेंट मारा गया है।
रेबीज़ के कितने पौधे शामिल हैं..?
डॉ. नायक कहते हैं कि ये सभी शॉप्स पेट पर थे। अब तो एंटी रेबीज़ टिकोन की बहुत उन्नत टैनोलॉजी आ गई है। अब रेबीज़मैरोन डि प्लालोड सेल वैरो सैल वैरायटीन मौजूद हैं। इन वैद्यों के मध्यम से वायरस की बहुत थोड़ी मात्रा शरीर में छोड़ी जाती है ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके। एंटी रेबीज के 4 कटिंग के कटर वाले व्यक्ति को कोकोनट मिलते हैं।
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पहले प्रकाशित : 13 सितंबर, 2023, 15:35 IST
