उत्तर
सूची के 9 महीनों को 3 तिमाही में रखा गया है, जिसमें हर तिमाही को 3 महीने मिलते हैं।
पहली तिमाही का गलत खान-पान पेट में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
गर्भावस्था की पहली तिमाही: मर्दाना हर महिला के लिए सबसे सुखद अहसास होता है। परिवार में भी नन्हें मेहमानों के आने की खुशी होती है। लेकिन ये महल खूबसूरत पुतलों वाला है, रत्न ही महान भी है। क्योंकि छीनाझपटी के दौरान महिलाओं में कई तरह के बदलाव आते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनके बदलाव पर विशेष ध्यान दिया जाए। क्योंकि उनका गलत लाइसेंस पेट में पल रहे बच्चों की सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए बेहतर है डॉक्टर की सलाह से पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें। जी हाँ, आज हम बात करेंगे पहली तिमाही की। इस दौरान गर्भवती महिला को पोषण आहार की अत्यंत आवश्यकता होती है।
असल में, डॉक्टर द्वारा 9 महीने से 3 तिमाही (ट्रिमेस्टर) में भर्ती कराया गया है। इसके हर तिमाही में 3 महीने आते हैं, जिसमें पहली तिमाही सप्ताह 1 से शुरू होती है और सप्ताह 12 तक चलती है। दूसरी तिमाही सप्ताह 13 से सप्ताह 28 तक रहती है। वहीं, तीसरे तिमाही सप्ताह 29 से बच्चे का जन्म शुरू हो गया है। सिद्धांतकारों का कहना है कि पहली तिमाही का गलत स्तर तीसरी तिमाही में नुकसानदायक हो सकता है। अब सवाल है कि पहली तिमाही में किन चीजों को खाना नहीं चाहिए? ये अपरिहार्य नुकसानदायक कैसे? उनके बच्चों की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है? इन दस्तावेजों के बारे में विस्तार से बताएं रही हैं संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल दिल्ली की सिंगिंगएक्शन डॉ. स्नेह बठला मुखी…
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फ़ास्ट फ़ार: व्रत की पहली तिमाही में फास्ट फूड के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि, फास्ट फूड में फास्ट फूड और फूड फूड शामिल होते हैं, जिनकी सेहत को नुकसान हो सकता है। हालाँकि, इसके बाद भी अगर किसी महिला को घर का खाना ठीक नहीं लग रहा है और उल्टी हो रही है तो डॉक्टर की सलाह थोड़ी कम हो सकती है।
अधपका मांस: कच्चा-अधपका मांस खाने से लिस्टेरियोसिस और टोकसोप्लाज्मोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा फूड पॉइजनिंग का भी खतरा बना हुआ है। ये गंभीर, गंभीर एलर्जी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में बेहतर यह है कि यदि आपके अंडे और मांस के भंडार पर गंभीर प्रभाव है तो उसे अच्छी तरह से पकाया जाना चाहिए।
चाय-कॉफ़ी: कुल में चाय-कॉफ़ी या चॉकलेट जैसी चीज़ें ठीक नहीं बनती हैं। असल में, इनमें कैफीन मौजूद होता है, जो गर्भावस्था के लिए घातक है। डॉक्टर का कहना है कि अधिक मात्रा में कैफीन लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, कैफीन का अधिक सेवन करने से जन्म के समय शिशु का वजन कम हो सकता है। ऐसे में जरूरी है इन रेलवे से दूरी।
कच्चा पपीता: किसी भी गर्भवती महिला को कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए। असल में, कच्चे पपीते में मौजूद केमिकल और उसके बीज पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता है। हालाँकि चॉकलेट पपीते का सेवन किया जा सकता है।
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एल्कोहल: विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था की किसी भी तिमाही में शराब और सीताफल का सेवन ठीक नहीं होता है। बता दें कि, अल्कोहल से गर्भपात और मृत जन्म का खतरा अधिक बढ़ सकता है। इस दौरान शराब के सेवन से पेट में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह किसी भी तरह से बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं है।
अध्ययन-अध्ययन आवश्यक: डॉ. स्नेहा के अनुसार, लिस्टिंग की जानकारी होती है ही डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है। इस दौरान डॉक्टर की मंजूरी के अनुसार सभी औषधियों को भी लेना चाहिए। हालांकि कई लोगों में यह भ्रम है कि लीच में लेने से गर्भपात को खतरा होता है, लेकिन यह पूरी तरह से गलत है।
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टैग: महिला स्वास्थ्य, जीवन शैली, गर्भवती महिला
पहले प्रकाशित : 24 सितंबर, 2023, 13:19 IST
