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लिंगेश्वरी माता के पदचिन्हों से तय होता है इस क्षेत्र का भविष्य! साल में एक बार खुलता है मंदिर का कपाट


लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा : कोंडागांव जिले के फारसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम आलोर के पहाड़ों के बीच एक गुफा में माता लिंगेश्वरी देवी विराजित हैं। लिंगेश्वरी माता की गुफा के द्वार वर्ष में केवल एक बार खुलते हैं। संत प्राप्ति और अन्य मनोकामना की मनसा लेकर हर साल हजारों की संख्या में भक्त अलग-अलग राज्यों से इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं।

आपको बता दें कि फारसगांव विकासखंड से बड़े डोगर मार्ग पर 9 किमी की दूरी पर ग्राम आलोर स्थित है, आलोर से लिंगिमाता (लिंगेश्वरी देवी) का स्थान झांतीबंध पारा में 3 किमी की दूरी पर है। भाद्रपद मास की नवमी तिथि के बाद आने वाले पहले वर्ष प्रति रविवार को इस अद्भुत गुफा का द्वार खुलता है। जहां रायटर में उभरे पदचिन्हों को देखकर पुजारी द्वारा साल भर की भविष्यवाणी की जाती है, रायटर को दर्शनार्थ गुफा में प्रवेश दिया जाता है। लोग संत की इच्छा लेकर बहुत दूर से यहां आते हैं, और माता के दर्शन होते हैं।

लिंगेश्वरी माता की परिभाषा क्या है?
लिंगेश्वरी माता मंदिर की मान्यता यह है कि एक बार एक कमर जाति का शिकार की तलाश में आलोर के जंगल में भटक रहा था। उसी समय उसे एक नन्हा ख़रगोश दिखा, जिसे शिकारी अपने धनुर्धर में बाण चडाकर ख़रगोश के पीछे भागता है। पीछा करते-करते अंत में वह खरगोश एक रंगनुमा बिल में घुस जाता है। जब शिकारी उस खरगोश को बाहर नहीं निकाला गया तो वह बिल बंद कर गांव में वापस आ गया। और दूसरे दिन सुबह शिकारी अन्य लोगों के साथ सुरंगनुमा गुफा में खरगोश की तलाश करते हैं, तो वहां पर खरगोश के स्थान पर पत्थरों से निर्मित लिंग की जड़ें होती हैं। उसके बाद सभी निराश्रित लक्ष्य वापस आ गए।

स्वप्न में माता ने दिया था ये आदेश
उसी रात एक व्यक्ति का स्वपन आता है कि साल में एक बार मेरी सेवा भाद्रपद नवमी के बाद आने वाले रविवार को करोगे तो मैं विवाह मंत्र को पूरा कर दूंगा। ये बात पूरे गांव में फैली, लोगों ने अपना-अपना घर खाली कर लिया। वे पूरी हो गई तब से अब तक अनगिनत निःसंतान को संतान की प्राप्ति हो चुकी है। माता के द्वार में भक्त जन ग्यान अपनी अपनी मांग रखते हैं। अगले वर्ष मंत्रोच्चार पूरी तरह से होता है वे माता के चरण में धन्यवाद के लिए सेवा पूजा अर्पण करते हैं। अब संस्था समिति का गठन कर उनके निर्देशन में मंडई का आयोजन किया जा रहा है।

पद चिन्हों से तय होता है भविष्य
लिंगेश्वरी माता की गुफा को बंद कर दिया जाता है। जब साल भर के बाद इस दरवाजे को खोला जाता है तो यहां अंदर के रेत पर यदि कमल के फूल के निशान दिखाई देते हैं तो धन संपत्ति में वृद्धि होती है, और हाथी के निशान के निशान दिखते हैं तो धन धान्य, यदि घोड़े के खुर के निशान दिखाई देते हैं तो युद्ध और कला , बिल्ली के पैर के निशान मिलें तो डर, बाघ के पैर के निशान मिलें तो जंगली शैतान का आतंक, और कुत्ते के पैर के निशान दिखें तो डर का प्रतीक माना जाता है, इसी से क्षेत्र का वार्षिक कैलेंडर तय होता है।

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