रामकुमार नायक/रायपुरः आज वह समय-समय पर धन्यवाद से कई आलोचकों का ध्यान आकर्षित करती हैं। गणेश उत्सव का अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी है। पूजा-पाठ के बाद गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन। गणपति बप्पा मोरया अगले वर्ष तू जल्दी आ के नारों के साथ विघ्नहर गणेश भगवान को विदाई देगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर गणेश जी का विसर्जन सबसे पहले किया जाता है। फिर विसर्जन के लिए लिया जाता है. पंडित श्याम सुंदर के अनुसार गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए मध्याह्न काल अर्थात दो बजे का समय सबसे अच्छा रहता है। अगर किसी कारणवश मूर्ति विसर्जन ना कर पाए तो सूर्य के बाद ना करें, अगले दिन सुबह कोई भी शुभ चौघड़िया कर सकते हैं।
29 सितंबर को गणेश विसर्जन हो सकता है
पंडित श्याम सुंदर ने कहा कि गणेश विसर्जन से पहले भगवान की पूजा विधि का विधान करना चाहिए। सबसे पहले आसन शुद्धि, भूत शुद्धि, आसन जजमान को आसन में साधु कुसमदीप पहनाया जाता है। फिर से किया गया कलश वरुण देवता की पूजा का शुभारंभ। गणेशजी को तिलक, चंदन और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। उसके बाद फूल चंदन अर्ध्य दिया जाता है। धूप अगरबत्ती नारियल नैवेद्य का चढ़ावा है। और जब जजमान स्टूडियो हैं तब हाथ से प्रार्थना की जाती है। भाद्र मास शुक्ल पक्ष के चतुर्थी के दिन गणपति जी का जन्म हुआ था। पूजा पूर्ण होने पर हम भगवान से ये प्रार्थना करते हैं कि रिद्धि-सिद्धि के साथ गणेश जी सदैव हमारे घर में रहें। अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी को अपने घर से विदा नहीं करना चाहिए। इसके अगले दिन यानी 29 सितंबर को गणेश विसर्जन किया जा सकता है।
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पहले प्रकाशित : 28 सितंबर, 2023, 14:04 IST
