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मॉनसून सीजन: मॉनसून की वापसी की तैयारी, देश में 6 फीसदी कम बारिश की बारिश रिकॉर्ड, 31% हफ्ते में सबसे ज्यादा बारिश


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पूर्वी भारत के बहार, झारखंड के साथ-साथ दक्षिण भारत के केरल में बारिश की कमी दर्ज की गई है
नार्थ ई लक्षण के मप्र और मज़ियोरम के साधकों में इस साल मानसून में कम बारिश हुई
देश के 226 प्रतिशत क्षेत्र में इस बार 20 से 60 प्रतिशत तक बारिश कम और 31 प्रतिशत हुई

नई दा फाइलली. मॉनसून ख़तम हो रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में मॉनसून (मानसून) के खतरे होने में अब 3 दिन का आराम है। आगामी 30 सितंबर तक मानसून के समागम होने की संभावना है। ऐसे में बात मॉनसून में बार-बार फिशिंग के रिकॉर्ड को लेकर भी शुरू होती है। इस बार मानसून के दौरान अमूमन कुल बारिश 6 फीसदी कम रिकॉर्ड हुई है। हालांक इस बार कहीं भी बहुत सारे रिवायत बार स्कीज़ दर्ज किए गए हैं तो कहीं पर क्रीएर्स (सूखा) जैसे दर्रे भी पैदा हुए हैं। नार्थ ई-मासात में मानपुर और मजोरम के अलावा पूर्वी भारत के बहार, झारखंड के साथ-साथ दक्षिण भारत के केरल में बारिश की कमी दर्ज की गयी है.

विभाग की माने तो देश के 226 सजावटी सीज़न 31 प्रतिशत क्षेत्र में इस बार 20 से 60 प्रतिशत तक बारिश कम रिकॉर्ड हुआ है. जहां तक छत्तीसगढ़ के 33 रेन डेकोर की बात है, यहां सिर्फ 6 डेकोरेटिव में ही औसत से कम हुई है. इसमें दो मध्य भाग के लगभग ही रकार्ड भी शामिल हैं। सीज़न सीज़न का अनुमान है कि छत्तीसगढ़ से मानसून रिटर्न 10 अक्टूबर के आसपास है। ऐसे में संभावना है कि कम से कम समय में कुछ और महीने में एक बार नामांकन हो सकता है।

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मिडिया रेन स्पोर्ट्स के मुताबकि आपके प्रदेश के 5 अवशेष समेत देश के 11 जिले भी ऐसे रह रहे हैं जहां 72 फीसदी तक की कमी हुई है। वहीं, देश के 372 शौचालयों में सामान्य बारिश हुई है। इसके अलावा, मौसम विभाग के अनुसार बारिश की मात्रा 20 प्रतिशत से कम होने की भी सामान्य श्रेणी में ही होती है। पूर्वी प्रदेश के 29 जिले, बिहार में 18, झारखंड में 15, केरल में 9, आंध्र प्रदेश में 7-7, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में 5-5 जिलों में 25% से 72% के बीच बारिश में कमी आई है।

सीज़न वीक भाग ने छत्तीसगढ़ के 6 स्कूटर में भी औसत कम वर्ष की रिकॉर्ड की है। इनमें से 2 सजावटी सरगुजा और जशपुर की स्थिति बेहद खराब है। इन दोनों में मोनसून में इश्तेहार पुस्तिकाएं बार-बार इश्तेहार का आधा हुआ है। हालांक के सीज़न विभाग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले महीने सितंबर में धीरे-धीरे पानी बरसना चाह रहा था। लेकन छत्तीसगढ़ का बेहद कम बारिश वाला जिला सरगुजा है जहां औसत 60 प्रतिशत से कम बारिश को रिकॉर्ड किया गया है।

वहीं, जशपुर जिले में भी 39 फीसदी कम पानी की बारिश है। सूरजपुर में पिछले कुछ दिनों में बदले मौसम के बाद भी 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दांते वेवड़े, कोरबा और कोरिया कम बार इश्तिहारों की ल माही माही में शाम फिल हैं। लेकिन मौसम की बारिश से एक-दो दिन की तेजी से मोनास का कोटा पूरा हो सकता है।

कृषि विशेषज्ञ का मानना ​​है कि इस बार देश का आधा हिस्सा कैसा है, किसानों की मार झेल रही है जो कि बेहद चॉइंता जेन है। धान के रकबा में जबरदस्त नजर आती है. पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों में जुलाई में बाढ़ आने के बाद धान की मूर्तियां उठीं और फिर से रिकॉर्ड में ले ली गईं, जिससे पेटी बढ़ गई। अब डिफॉल्ट की वापसी शुरू हो गई है यानी हवा में दवा भी खत्म हो जाएगी, मैसाचुसेट्स पर असर होगा। रबी की बीमारी पर भी इसका प्रभाव पड़ा क्योंकि अलनीनो की मार शुरू हो गई थी।

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इस बीच देखा जाए तो पूरी रात बारिश की कमी की वजह से कृष्णा की किस्मत पर असर पड़ा है। धान, गाय का मांस और श्रीअना दर्शन को सभी दलहन, त शेषलाहन, जूट और सिक्के की विनाशलीला में कमी और रस्सी की गई है। कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाआसपेक्षिक और ओड दर्शन में धान की मूर्तियां अंकित की गईं। इन पांचों सहयोगियों में शामिल हैं पिछले साल के कारखाने 4.58 लाख ह. के स्वामित्व में धान की दुकान नहीं हो सकीना.

इस साल कर्नाटक में 3.12 लाख ह. अनारक्षित शेयर में 2.66 लाख ह. अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला है. मोनसून का सबसे गहरा असर राजस्थान में नुकसान के तौर पर देखा जा सकता है। यहां अगस्त में जरूरत के हिसाब से महीने की बारिश नहीं हुई और फसल कटाई के समय में सितंबर में महीने की बारिश नहीं हुई। ऐसा ही हाल कुछ गुजरात में रह रहा है. उत्तर प्रदेश में सोयाबीन और यूपी व बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में धान की बर्बादी हुई है।

टैग: कृषि, आईएमडी, मानसून, वर्षा



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