उत्तर
रेबीज का वायरस कुत्ते के लार के माध्यम से इंसानों के शरीर में पहुंच जाता है।
रेबीज़ कुत्ता, बिल्ली और बंदर के काटने से जानवर वाली खतरनाक बीमारी है।
रेबीज़ से कैसे बचें: रेबीज एक वायरल जूनोथोमिक डिजीज है, जो कुत्ते, बिल्ली और बंदर सहित कुछ टुकड़ों के टुकड़े से इंसानों में फैलती है। करीब 99 प्रतिशत मामलों में रेबीज़ की बीमारी का इलाज किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में हर साल रेबीज की वजह से 59 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें 40 प्रतिशत 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे होते हैं। प्रोफेशनल्स वाली बात ये भी है कि रेबीज के 90 फीसदी से ज्यादा मामले एशिया और अफ्रीकी देशों से सामने आए हैं. रेबीज़ बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका पहचान पत्र में पता चला जाए, तो उसकी मृत्यु हो सकती है। इसी महीने राजधानी दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद में एक 14 साल के बच्चे की रबीज़ की मौत हो गई थी। तब रेबीज को लेकर काफी चर्चाएं हुईं और लोगों ने एथियाट कलाकार भी शुरू कर दिया। रेबीज़ के बारे में लोगों के बीच जानकारी की भी कमी है।
हर साल लोगों को रेबीज से बचने के बारे में सलाह दी जाती है वर्ल्ड रेबीज डे (विश्व रेबीज दिवस) मनाया जाता है. पहली बार रेबिज डे साएह की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। इस खास दिन को सेलिब्रेट करने का उद्देश्य रेबीज से होने वाला खतरा और इससे बचने के बारे में जागरुकता फैलाना है। रेबीज की वैक्सीन बनाने वाले फ्रेंच केमिस्ट और माइक्रोबायोकसाइंस लुई पाश्चर की मृत्यु 28 सितंबर 1895 को हुई थी। उन्होंने 1885 में सैनबीज की वैक्सीन का डोज इस लाइलाज बीमारी से बचने का उपाय खोजा था। यही वजह है कि उनकी डेथ एनिवर्सरी को विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है। रेबीज़ की बीमारी से बचने के लिए टीका उपलब्ध है। कुत्ते के काटने के बाद सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लग जाए, तो रेबीज से बचा जा सकता है।
रेबीज का वायरस कैसा है?
दिल्ली के यमुना विहार स्थित हैरी पेट्स इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सर्जरी सेंटर के डॉ. हरअवतार सिंह के अनुसार कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से रेबीज और अन्य जून थियोलॉजिकल डिसीज हो सकते हैं। इन अभागे के लार में रेबीज का वायरस होता है। जब कुत्ता किसी इंसान को काटता है, तो उसके लार के माध्यम से रेबीज का वायरस इंसानों के खून में पहुंच जाता है और संक्रमण फैल जाता है। कुत्ते के कुचलने से रेबीज़ की बीमारी हो सकती है। चित्र लोग दिखते हैं कि पतलू पेंटिंग के कटर से रबीज का खतरा कम होता है लेकिन ऐसा नहीं है। डॉग बेबी को कभी-कभी भी दवा में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलकर एंटी रैबिज वैक्सीन लगवानी चाहिए। कुत्ता पालतू जानवर हो या ड्राइवर, सभी डायनासोर के कटर से रेबीज पाया जा सकता है। बच्चों को बचपन से ही दूर रखना चाहिए।
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अगर कुत्ता काट ले तो क्या करें?
डॉक्टर हरअवतार सिंह का कहना है कि कुत्ते को काटने के तुरंत बाद प्रारंभिक कार्य लेना चाहिए। आप सबसे पहले कुत्ते के काटने वाली जगह पर साबुन और पानी से लगातार 15 मिनट तक धोते रहें। कुत्ते के लार से निकला वायरस साबुन से ख़त्म किया जा सकता है. इसलिए फर्स्ट एड अत्यंत आवश्यक है। अगर घाव ज्यादा हो तो उस पर कोई क्रीम नहीं लगाई जा सकती। हालाँकि फर्स्ट एड के बाद धीरे-धीरे जल्दी हो सके, डॉक्टर से मिलकर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। कुत्ते के काटने वाले के 24 घंटे के भीतर एंटी रैबीज वेक्सिन की पहली खुराक लगाई जानी चाहिए। वैक्सीन की दूसरी खुराक तीसरे दिन, तीसरी खुराक तीसरे दिन, चौथी खुराक 14वें दिन और पांचवी खुराक 28वें दिन दी जाती है। एंटी रेबीज वैक्सीन की कुल 5 खुराक दी जाती हैं।
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पहले प्रकाशित : 28 सितंबर, 2023, 10:48 IST
