नरेश पारीक/चूरू: राजस्थान का खान-पान और यहां की लोक संस्कृति की पहचान देश ही नहीं विदेश में भी है अपने चटपटे और लजीज स्वाद से यहां का खान-पान किसी को भी अपना दीवाना बना दे। जी हाँ चूरू में बनने वाली मिठाइयाँ जिनका स्वाद देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भी दीवाने हैं। लगभग 100 साल पुराने हमराज जलपान गृह पर विश्राम वाले तीसरी पीढ़ी के प्रेम प्रकाश शर्मा की झलक यहाँ बनने वाली मिठाइयाँ की वैरायटी में उनके काजू स्नोकी और भी हैं मिठाइयों से बनी यह मिठाई इसका स्वाद बनाती है जिसे देखने वाले के मुंह में पानी आ जाए और आप भी इसे बिना चखे नहीं रह सकते।
शर्मा स्टूडेंट हैं बुरे इस शैतान की सबसे खट्टी बात ये है कि ये कई दिनों तक नहीं होती और अपने लाजवाब स्वाद के साथ किसी को भी अपना दीवाना बना देती है। शर्मा स्टूडेंट आमतौर पर बर्फीले होते हैं तो प्रदेश के हर हिस्से में दिखते और बिकते हैं, लेकिन उनका काजू स्नोकी आपके लिए खास है। कर्मचारी छात्र आमतौर पर काजू स्नोकी 600 रुपये प्रति किलो बिकती हैं। लेकिन उनके यहां काजू स्नोकी के 400 रुपए प्रति किलों का भाव है। शर्मा स्टूडेंट हैं विदेश जाने वाले लोगों की ये काजू स्नोकी पहली पसंद है, तो खाने के बाद मीठे खाने की शौकीन भी इसे बड़े चाव से बताती हैं।
ऐसी ही एक आकृति है ये बर्फी
शर्मा स्टूडेंट अपने काम के सिलसिले में हर रोज 15 से 20 किलो काजू स्नोकी ब्लॉक बेचते हैं और तुरंत बिक जाते हैं। शर्मा कम भाव की बात करते हुए कहते हैं ये काजू स्नोकी वह स्वंय ब्लॉक हैं कम प्रोफिट लेते हैं। हलवाई स्वंय है आम तौर पर 600 रुपये की बाइक वाली ये काजू स्नोकी वह 400 रुपये की बाइक वाली हैं और ताज़ा और गहनों के भंडारण में भी इसे खा सकते हैं। काजू को पानी में भिगोते हैं फिर काजू को साफ करते हैं फिर पिसाई करते हैं फिर काजू को भट्टी पर एक घंटे तक की मंदी को देखते हैं काजू के बराबर चीनी देते हैं फिर काजू को भट्टी पर एक घंटे तक की मंदी को बढ़ाते हैं। घन तैयार होने पर ठंडा करने के लिए बहुत सारे हैं फिर पाटे पर बेलते हैं और बर्फी की कटिंग होती है।
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पहले प्रकाशित : 29 सितंबर, 2023, 10:00 IST
