विद्वान अभिजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि इस दुकान की शुरुआत मेरे चित्र 1935 में हुई थी, यहां की शुद्ध धोई से बनी इमरती मशहूर है। इनके बनाने के तरीके भी हम लोग कुछ अलग अपनाते हैं।
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विद्वान अभिजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि इस दुकान की शुरुआत मेरे चित्र 1935 में हुई थी, यहां की शुद्ध धोई से बनी इमरती मशहूर है। इनके बनाने के तरीके भी हम लोग कुछ अलग अपनाते हैं।
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