Homeदेश'जाट बताएं, लेकिन आर्थिक स्थिति नहीं; 'मकसद राजनीति है', कुशवाहा ने...

‘जाट बताएं, लेकिन आर्थिक स्थिति नहीं; ‘मकसद राजनीति है’, कुशवाहा ने जातिगत गणना रिपोर्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाया


उत्तर

शक-कुशवाहा पर सरकार का आर्थिक चित्रण प्रस्तुत करने से।
केवल जातीय पात्र देना राजनीतिक लाभ लेना की ही संवैधानिक विशेषता है-कुशवाहा।

पटना. राष्ट्रीय लोक जनता दल (आरएलजेडी) के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री धनंजय कुशवाहा ने बिहार सरकार के जातीय सर्वेक्षण का डेटा जारी करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कुशवाहा ने जातीय गणना के आंकड़ों को फर्जी बताया है और कहा है कि सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट में कई खामियां हैं। ऐसा लगता है कि सरकार ने हरिद्वार में जातीय गणना के आंकड़े जारी किये हैं। आरएलजेडी नेताओं ने कहा कि जातिगत गणना सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ सरकार का आर्थिक पात्र प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए और केवल जातिगत श्रेणी को राजनीतिक लाभ लेने की सलाह दी जानी चाहिए।

जातिवादी कुशवाहा ने कहा कि सरकार का आर्थिक पात्र प्रस्तुत करना और विशेष जाति वर्ग, राजनीतिक लाभ लेना संस्थागत नहीं है। राजनीतिक लाभ किस तरह से मिल जाए उकी यही संवैधानिक है। ये सभी राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। बिहार सरकार, तात्कालीन राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

रेस्टॉरेंट कुशवाहा ने कहा कि जैसे-तैसे रिपोर्ट में इस तरह के खतरे का काम किया गया है। रिपोर्ट भी कई दावों से भरी है। सरकार को चाहिए कि व्यक्ति के नाम के साथ पूरी उपलब्ध सूची, ताकि कोई भी परिवार अपना पात्र देख सके। कुशवाहा ने कहा कि अतिपिछड़ा समाज के बारे में एक बात कही गई है, अब सरकार अतिपिछड़ा समाज का गठन करेगी।

'जाट बताएं, लेकिन आर्थिक स्थिति नहीं;  'मकसद राजनीति है', कुशवाहा ने जातिगत गणना रिपोर्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाया

दशहरा ने डॉक्यूमेंट्री जारी करने का स्वागत करते हुए कहा कि बहुत से लोगों ने डॉक्यूमेंट्री जारी करने का काम किया है। जातीय गणमा में भी जातीय गणमा में शामिल किया जाता है। पंचायत स्तर पर आंकड़ों की जांच की जाए, ताकि हर व्यक्ति यह देख सके कि उसके आंकड़े जोड़े गए हैं या नहीं। जातीय गणना की रिपोर्ट में संशोधन कर उसे फिर से जारी किया जाए। अगर ऐसा न हो तो लोगों के मन में जो खतरे हैं वह हमेशा बनी रहती हैं।

कुशवाहा ने गांधी जयंती पर रिपोर्ट जारी करने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गांधी जी के काम की रिपोर्ट जारी की गई है और अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। ये ठीक नहीं है. नीतीश जी का भी नाम लेते हैं गांधी जी, लेकिन उनकी बातें भी याद करनी चाहिए. राजद के साथ आपकी टीम में किस तरह से जेल में बंद लोग शामिल हैं? कई लोगों को सज़ा मिली है. गांधी जी के नाम पर गलत साधन रखना ये गलत है। जब साधन ही गलत है तो साधन भी ठीक नहीं होगा।

टैग: बिहार के समाचार, जाति आधारित जनगणना, जाति की राजनीति, लोकसभा चुनाव 2024, उपेन्द्र कुषवाहा, बिहार



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img