नई दिल्ली. जातीय बिहार सर्वेक्षण (बिहार जाति जनगणना) के सर्वेक्षण के जारी होने के बाद बीजेपी ने नामांकित तुष्टिकरण की राजनीति से मतदाता पेशी के लिए जाति के लिए नए नामांकन से हो रही कोशिश का मुकाबला किया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेपी ने कहा है कि उसकी सोशल इंजीनियरिंग कैप्सूल्स पिज्जा को बढ़ावा देने वाली कंपनी हर जगह ज्यादा प्रभावशाली दिख रही है। नरेंद्र मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) ने मंगलवार को जगदलपुर में एक रैली में कहा कि ‘देश को जाति के नाम पर चमकाने की कोशिश की जा रही है।’ दिसंबर 2006 में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में अपने पूर्व राष्ट्रपति मनमोहन सिंह के भाषण का ज़िक्र किया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि ‘सिंह कहते थे कि देश का पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है… लेकिन अब कांग्रेस कह रही है कि समुदाय की आबादी तय करती है कि देश का पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का होगा।’ तो क्या अब कांग्रेस अल्पसंख्यकों के अधिकार कम करना चाहती है? क्या वे अल्पसंख्यकों को निर्धारित करते हैं? यह बात साबित करने के लिए कि जाति सर्वेक्षण ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ है, भाजपा ने दावा किया है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके पूर्ववर्ती प्रसाद ने मुस्लिम अगड़ी समूह को अत्यंत प्राथमिक वर्ग (ईबीसी) श्रेणी में शामिल किया है। असल में हिंदू में ‘ईबीसी’ में आने से वोट दिए गए।
ईबीसी नीतीश का मुख्य आधार
विद्वान ईबीसी नीतीश का मुख्य समर्थन आधार हैं। वरिष्ठ अल्पसंख्यक और बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय स्टूडियो ने कहा कि ‘1996 से 2013 तक विश्वास प्रसाद और नीतीश कुमार ने अगाड़े को ईबीसी श्रेणी में शामिल करने की कोशिश की। सुशिक्षित और शासक वर्ग के कट्टरपंथियों को ईबीसी श्रेणी में शामिल करके इन दोनों नेताओं और उनके समर्थकों ने न तो हिंदू समुदाय में वास्तविक ईबीसी के साथ, बल्कि आदर्श वर्ग के साथ भी अन्याय किया है। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों कंपनियों के नेताओं ने एक्जीक्यूटिव आर्टिस्ट के साथ ईबीसी कम्यूनिटी को शामिल किया है। इससे वास्तविक ईबीसी को मिलने वाला सारा पूर्वोत्तर खत्म हो गया है।’
जातीय मुस्लिम सर्वेक्षण तुष्टिकरण की रणनीति
जयसवाल ने लगाया आरोप जातीय सर्वेक्षण के आंकड़ों ने केवल राज्य में पोर्टफोलियो गठबंधन की ‘तुष्टिकरण रणनीति’ के रूप में काम किया है। यह प्राकृतिक के संबंध में डॉ. बीआर कॉम की मूल भावना और इरादे का उल्लंघन है। दरअसल सरकारी आयोग और मंडल आयोग ने कहा था कि केवल उन लोगों को एकजुट किया जाना चाहिए जो मूल रूप से अचल संपत्ति के रूप में शामिल हैं। राज्य भाजपा नेताओं ने कहा कि ठकुराई, शेखोरा और कुलैया मुस्लिम समुदाय को एक साथ जोड़कर विचारधारा के रूप में माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्हें ईबीसी सूची में जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि कुलैया शेख मुसलमान वे थे, पूर्वज यमन से थे और मुगलों के साथ भारत आये थे। राजद नेता मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहने के दौरान इन साइकोलॉजी को ईबीसी में शामिल किया गया था।
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सीमांचल के सभी ईबीसी अगाड़े मुस्लिम
आइडल ने कहा कि ‘अगर आप सीमांचल के ईबीसी पर नजर डालेंगे तो आपको एक भी मूल हिंदू नहीं मिलेगा।’ पहली सूची में ईबीसी में कम से कम सात प्रतिशत ऐसे अगाड़ी जाति के मुसलमान शामिल हैं।’ वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कहा कि जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट में उनकी विचारधारा पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। बीजेपी ने छोटे बैटरी समूह को संगठन में शामिल करने के साथ-साथ चुनाव की सूची में जगह बनाई है। बीजेपी के सोशल-इंजीनियरिंग फॉर्मूले और पीएम मोदी के खुद के गठबंधन से बीजेपी को फायदा मिला है। प्रोपोज़ल अपील जाति की सीमा से परे है। बीजेपी ने अपनी उच्च विचारधारा वाली पार्टी की छवि को तोड़ दिया है। 2014 के बाद से खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पिछड़ने के बाद बीजेपी अपने लक्ष्य में सफल रही है।
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पहले प्रकाशित : 4 अक्टूबर, 2023, 07:53 IST
