साइलेंट वॉक के लाभ: ये बात तो सभी जानते हैं कि रोज़ाना वॉक करना मंत्रमुग्ध करने वाला है। स्वस्थ्य रहने के लिए सभी को सुबह कम से कम 30 मिनट तक जरूर टहलना चाहिए लेकिन कुछ लोगों को टहलने के लिए दोस्तों या सहेलियों की टोली जरूर चाहिए, अगर कोई दोस्त संगी नहीं है तो कान में ईयर फोन या हेडफोन लगाकर गाने जुड़े हुए हैं या फिर फिर से टहलते हैं टोकने के समय को बेकार न जाने की बात, हैशटैग या सेज रिलेशनशिप से फोन पर बतियाते हुए चलते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह ठुमके लगाने का सही तरीका बिलकुल भी नहीं है। जानना होगा कि पूरी मेहनत करने के बावजूद भी आपके शरीर को पूरा फायदा नहीं मिल रहा है।
बता दें कि हाल ही में टिकटॉक ट्रेंड से एक बार फिर से चर्चा में आपको आई साइलेंट वॉकिंग ही वॉक करने का सही तरीका है। विशेषज्ञ की सलाह तो व्यावसायिक योग्यता के लिए रामबाण है। योग में एकांत में गोल्फ़ वॉकने को बेहतरीन असायम और प्रकृति से लेकर क्वेश्चन की एक विधि बताई गई है।
क्या है साइलेंट वॉक?
लेंथ साइल वॉक का अर्थ है शांत किनारे धीरे-धीरे-धीरे-धीरे चलना। ये वॉक का सबसे सही तरीका है. लैंट साइकल वॉकिंग का मतलब हेडफोन, ईयर फोन या फोन पर बातें करते हुए, दोस्तों की टोली में बिना एकांत में टहलने से होता है। इससे हम प्रकृति के करीब होते हैं और खुद को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
देश के जाने माने योग एक खंड डॉ. बालमुकुंद शास्त्री शिष्य हैं कि चलना एक पूर्ण अस्तायम है। कोशिश करनी चाहिए कि सुबह कैथोलिक-धीमे साइलेंट वॉक की जाए। सुबह अलट्रा वायलेट किरणें नहीं होने के कारण, ऑस्ट्रेलियन अच्वेल्य सेसेटल है और इसके शरीर को हल्दी धूप से विटामिन डी भी मिलता है। अगर सुबह सैर न करें तो शाम को सूर्यास्त के बाद ही चलना चाहिए।
मेंटल और न्युमर केमिकल डिसऑर्डर ठीक होते हैं
अगर वॉक करने के तरीके की बात करें तो बच्चों की जाने वाली वॉक से बॉडी को वॉकिंग के सभी फायदे मिलते हैं। अगर आप बिना गपशप, हेड फोन, ईयर फोन या बातचीत के आराम से घूम रहे हैं तो इससे पहले तो आपका मन एकदम शांत रहता है। योग के अनुसार आपका प्राण आपके साथ होता है। आप चलते हैं, अपने आप को महसूस करते रहते हैं, अपने बारे में सोचते रहते हैं। इसके अलावा सभी प्रकार के मानसिक रोग, मानसिक विकार या न्युमेरिक मिनरल डिजीज में बहुत सुधार देखने को मिलता है।
शरीर में शक्तिशाली है ऊर्जा
डॉ. बालमुकुंद कहते हैं कि हमारा शरीर पंच महाभूत आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी से बना है लेकिन अस्तित्व के चक्र में हम इनसे दूर होते चले जा रहे हैं। जब हम एकांत में चल रहे होते हैं तो हमारी नजर चारों ओर मौजूद होती है, आसपास के पेड़-पौधों, मिट्टी, पानी को हम देख रहे होते हैं तो सहज स्वभाव बनता है और इस तरह हम प्रकृति से जुड़ते रहते हैं और इन्हें देखने से हमारे शरीर को पंचमहाभूतों के तत्त्व मिलते हैं। जैसे सूर्य को देखते हैं तो अग्नि तत्त्व का सिद्धांत होता है और शरीर ऊर्जा का पावर हाउस बनना प्रतीत होता है।
दिल रहता है पसंदीदा वोट
लेंथ साइकल वॉकिंग से दिल को लाभ मिलता है। देखा गया है कि वॉक करते हुए बहुत सारे लोग हार्ट अटैक पर आ गए हैं लेकिन उनमें से फिर सभी ऐसे हैं जो तेजी से या तो ट्रेडमिल पर दौड़ रहे थे या हैवी एक शेयरधारिता कर रहे थे। जब दिल पूरी तरह से काम नहीं कर रहा था लेकिन उस पर दस्तावेज़ दिए जा रहे थे। इससे हृदय को यह समझ में नहीं आता है कि धीरे-धीरे चलना या तेजी से चलना और डायरमोक की संभावना जनसंख्या है। लेकिन अगर धीरे-धीरे और एथलीट चलते हैं तो दिल अच्छे से काम करता है। मोटरसाइकिलें हाई नहीं होतीं. ऑरिजिएजन अचछे से मिलने से रिवोल्यूशन के नायक रहते हैं। परमाणु ऊर्जा पूरी तरह से बाहर है। इससे वाट, पिट्स और कफ बहते हुए होते हैं तो कम होते हैं और शरीर की स्वतंत्रता का शौक रहता है।
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पहले प्रकाशित : 27 सितंबर, 2023, 19:45 IST
