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राजस्थान की मेगा रसोई की कहानी
स्टीम से बनाया जाता है हजारों लोगों का खाना
आबू रोड स्थित शांतिवन में यह विशाल किचन स्थापित किया गया है
प्रतीक चिन्ह.
सिरोही. राजस्थान में एक अनोखा अनोखा किचन है, जहां सिर्फ 60 लोग मिलकर 40 हजार लोगों का खाना तैयार करते हैं। यह मेगा किचन आबूरोड के शांतिवन में स्थित है। वहां पर केवल मसाले से खाना पकाने के लिए प्याज जाता है। इस किचन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां साफ-सफाई का बेहद ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा यहां पर उपयोग होने वाले फल-पुस्तक को ब्रह्माकुमारी संस्थान के स्वंय जैविक खेती द्वारा बनाया जाता है। साथ ही संस्थान में कार्य करने वाले सभी व्यक्ति श्रद्धा भाव के आधार पर नि:शुल्क ब्याज प्रदान करते हैं।
संस्थान में खाना बनाने से लेकर सब्जी काटने तक के लिए सभी अलग-अलग चैंबर बनाए गए हैं। किचन में आगमन होता ही बहुत सारे स्टीम मशीन लगे हुए दिखाई देते हैं जिसमें ब्रेकफ़ास्ट, डायनर, मोटोरोला, सब मसाले से तैयार होता है। इसके पास ही ऊपर की तरफ एक चैंबर बना हुआ है, जहां पर दाल-चावल का मसाला जाता है। इसके अलावा रिवॉल्वर द्वारा धोने, काटने और बनाने की जगहें लगी हुई हैं जहां इतनी बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जाता है।
जर्मनी ने सूर्य कुकर का चिकित्सक लिया था
ब्रह्माकुमारी संस्थान के मेगा किचन के सेफ बीके राजेश्वर ने बताया कि यह 1994 की बात है जब लोगों के पास गैस कनेक्शन नहीं था। उस समय ब्रह्माकुमारी संस्था की टीम ने जर्मनी में देवलप सौरव कुकर के बारे में जानकारी दी। संस्था ने इस पर विचार करके निर्णय लिया कि इसे आबूरोड स्थित शांतिवन में स्थापित किया जाए। जर्मनी से सौरव कुकर का इंटीरियर यहां लाया गया और पहली बार 800-900 लोगों के लिए स्टीम खाना तैयार किया गया।
प्रतिदिन 3 से 4 टन स्टीम पैदा हो रहा है
सेफ बीके राजेश्वर ने बताया कि सूरज कुकर का प्लान सैक्स हुआ तो इसकी क्षमता 15000 लोगों के लिए खाना बनाना शुरू किया गया। धीरे-धीरे जब संस्था से जुड़े लोगों की संख्या बढ़ने लगी तो इस रसोई मेगा किचन में बदलाव दिया गया। ऐसी ही किचन जिसमें रोटियां बनाने से लेकर हर काम की ऑटोमेटिक मशीन मिलती है। आज यहां पर सूरज कुकर से रोज करीब 3-4 टन स्टीम पैदा कर 30 हजार से 40 हजार लोगों के लिए ब्रेकफास्ट, साइज और डिनर तैयार किया जाता है।
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पहले प्रकाशित : 4 अक्टूबर, 2023, 18:15 IST
