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इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था, सात समुंद्र पार से ज्योत जलवाने आते हैं भक्त


रामकुमार नायक/रायपुरः नवरात्रि की शुरुआत सबसे पहले मराठा समाज में हुई। रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की मां महाकाली मंदिर में किसी भी व्यक्ति के भक्तों की भावना ज्योत जलती नहीं है, मंदिर में श्री फल विक्रेता बने हुए हैं। कई भक्त अपनी अलग-अलग मनःस्थिति पूरी करने के लिए मां महाकाली मंदिर परिसर में बांधे हुए हैं। भक्त अपना परिवार, बाल गोपाल, बच्चों की बेहतर शिक्षा जैसे कई मन-मस्तिष्क लेकर जाते हैं ये मंदिर स्तम्भ। अमेरिका में है ये मंदिर, अन्य, नेपाल के भक्तों का मन ज्योत जलाई जाता है। भक्तों की महाकाली माता के प्रति अपार श्रद्धा है।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार इस वर्ष तेल ज्योतिष के लिए 901 रुपये और घी ज्योति के लिए 2101 शुल्क शुल्क निर्धारित किया गया है. मन ज्योति प्रकाशित की राशि जमा करने सुबह 9 अपराह्न से दोपहर 12 तक एवं शाम 5:30 रात से 10 पीएम तक मंदिर स्थापना राशि जमा कर सकते हैं और मन ज्योत सुनिश्चित कर सकते हैं।

काफी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं
महाकाली मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर क्या है 70 से 75 वर्ष पुराना है. जो भी भक्त अपना मन लेकर आते हैं, वे कभी खाली हाथ नहीं जाते। महाकाली माँ अपने भक्तों की सारि मन्तियाँ पूर्ण करती हैं। इस मंदिर के निश्चित संख्या में भक्त दर्शन और पूजा करने आते हैं

यहां सभी भक्तों की भावनाएं पूरी होती हैं
पंडित मामाजी ने आगे बताया कि सारि ज्योत मन का अकाउंट क्या होता है। भक्त अपने भाव के मनोवैज्ञानिक मन ज्योत जलते हैं। मां के अलावा प्राकृतिक ज्योति जलवाने के नियम वाले भक्त भी मां महाकाली के इस मंदिर में आते हैं। मन की ज्योति जलना भक्त के आस्था पर प्रतिबंध है कि किस भाव से वह मन की ज्योति जला रहा है। गणेश विसर्जन से ज्योत प्रज्वलन के लिए शुल्क लेना शुरू हो गया है।

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