ब्यूरो/वर्षगढ़। मीठे खाने के शौक सभी होते हैं और मीठे में अगर दोस्त की बात की जाए तो बड़ों से लेकर बच्चों तक की ये पंसदीदा होती है। आदिवासियों के अनुयायियों के लिए सालगढ़ में एक खास जगह है, जहां आपको 21 तरह की कहानियां मिलती हैं।
वर्षगढ़ के मेन बाजार में प्रेम शंकर ने सबसे पहले ऑटोमोबाइल बनाने का काम शुरू किया था। दुकान के मालिक प्रेम शंकर शर्मा ने बताया कि 1996 में वे वर्षगढ़ आये और एक रेहड़ी स्टॉक का काम शुरू किया, जिसमें उन्होंने 5 रुपये के अकाउंट से दाखिला लिया। अब वह यहां 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के 21 तरह के सुपरमार्केट का काम कर रहे हैं।
हर दिन करीब 2500 लोग कॉमरेड का स्वाद लेते हैं
उन्होंने बताया कि उनकी दुकान पर हर दिन 2000 से 2500 ग्राहक आते हैं। उन्होंने ये काम अपने पिता से सीखा है और वे इस काम को 27 साल से कर रहे हैं। उनके पिता ने गुजरात में नारियल बनाने का काम किया था। उन्होंने ही सिखाया कि वैज्ञानिक कैसे बनते हैं। पिता से कोचिंग बनाने का काम सीखने के बाद 1996 में वे सालगढ़ आये और एक छोटी सी रेहड़ी से कोचिंग का काम शुरू किया।
21 तरह के आशिक
प्रेम शंकर ने बताया कि वह 21 तरह के कॉमल ड्राईंग हैं, जिनमें सबसे ज्यादा लोगों को फालूदा, स्पेशल कोमॅनिल, गुलकन्द कॅन्ट्रल, राजभोग, केसर पिस्ता, काजू कॅाजू डीनॅलमेन्ट पसंद आती है और गुलकन्द कॅामिनल सबसे ज्यादा बिकती है। औद्योगिक उत्पादन में 200 लीटर दूध लगता है। दुकान का समय दोपहर 1 बजे से लेकर रात 11 बजे तक रहता है।
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पहले प्रकाशित : 6 अक्टूबर, 2023, 13:37 IST
