रामकुमार नायक/रायपुर. न्याय के देवता कहे जाने वाले भगवान शनिदेव के बारे में कौन नहीं जानता है, शनिदेव को दंडाधिकारी भी कहा जाता है। शनिदेव यदि कोई व्यक्ति से आकर्षित हो तो वह व्यक्ति को रंक से राजा बना देते हैं। वहीं, अगर कोई व्यक्ति नाराज हो जाए तो उसे राजा से रंक बनने में समय नहीं लगता। ऐसे में भगवान शनिदेव की कृपा पाने के लिए भक्त पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। शास्त्रों में शनिदेव का रंग काला बताया गया है। इसलिए शनिदेव को काले रंग के देवता अति प्रिय हैं।
शनिवार के दिन भगवान शनिदेव को जन्मदिन मनाया जाता है। शनिवार को सुबह से शाम तक शनि मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। भक्त सुबह से ही तेल, काला तिल, धातु, काला कपड़ा, नारियल में सभी आवश्यक पूजा सामग्री लेकर मंदिर स्थापन शामिल हैं। वैसे तो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कई स्थानों पर भगवान शनि देव की पूजा स्थल हैं। लेकिन महाराज बंध तालाब के तट पर भक्त सुबह 5 बजे से निकोलस हैं।
ऐसे करें भगवान शनिदेव की पूजा
शनि मंदिर के सेवक यदु काका जी ने बताया कि शनिदेव महाराज बंध तालाब के तट पर पीपल के पेड़ के नीचे मंदिर हैं। शनिवार के दिन यहां हजारों भक्त आते हैं। शनिदेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। शनिदेव में आयुर्वेदिक तेल, काला तिल, फूल, कोट, किला, उड़द दाल, काला कपड़ा पहनाया जाता है. भक्त सबसे पहले जड़ी बूटियों के तेल से शनि देव को स्नान कराते हैं। फिर काले वस्त्र परिधान होते हैं फिर लोहे की धातु, काला तिल, उड़द की दाल, चना, नारियल चढ़ाते हैं. अंत में दीपक और अगरबत्ती दीपक भगवान शनिदेव की पूजा की जाती है।
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पहले प्रकाशित : 7 अक्टूबर, 2023, 14:05 IST
