विशाल भटनागर/मेरठ.मौसम में हो रहे बदलाव के बाद प्लास्टिक का भी असर देखने को मिल रहा है. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस बुखार की चपेट में आ रहे हैं। प्रतिदिन सरकारी निजीकरण के साथ-साथ निजी निजीकरण में बड़ी संख्या में मरीज अपना इलाज कराने के लिए समुद्र तट तक पहुंच रहे हैं। सरकारी फैसिलिटी की बात की जाए तो जहां पहले 100 से 200 मरीज ही बुखार के आ रहे थे। अब यह संख्या 300 पार कर चुकी है।
ऑनलाइन मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न गुप्ता ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण छोटे-छोटे बच्चे भी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो से तीन प्रकार के ऐसे वायरल चल रहे हैं. प्रतिशत में छोटे बच्चे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में माता-पिता को बच्चों की अधिक देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा मौसम होता है जब हीट लिक्विड दोनों मिलते हैं। उन्होंने बताया कि सांप में आने वाले डायरी में वायरल और रिकॉर्ड के मरीज अधिक पाए जा रहे हैं।
बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें
डा नवरत्न गुप्ता ने कहा कि किस तरह से बच्चों को घर में बुखार आता है। कई बार घर पर सावधानी के तौर पर रेकी क्रोसिन एवं पेरासिटामोल का उपयोग माता-पिता द्वारा किया जाता है। लेकिन आप जो बुख़ार चला रहे हैं। इसमें शामिल है अगर आप पहले इन मसालों को भी दे दें तो उसके बाद के डॉक्टर को जरूर देखें। क्योंकि बच्चे को सर्दी, सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, सूजन सहित अन्य प्रकार की कोई भी समस्या होती है तो यह वायरल बुखार भी हो सकता है। विविध विकल्पों पर वायरल रूप ले जाता है। कई बार प्लेटलेट कम से कम एक प्रश्न का सामना करना पड़ता है।
खान-पान साफ-सफाई पर ध्यान दें
मौसम के अनुसार बच्चों को ज्यादा जंक फूड ना दें.खानपान का विशेष ध्यान रखें. इसी के साथ-साथ जिस प्रकार की ग्रेडिंग का जोखिम बढ़ रहा है। इसे देखते हुए चारों ओर पानी भी जमा हो गया ना। जो लेबल्स अगर आपके घर में चल रहा है। तो समय समय पर अपने पानी की दुकानें लाइव करें। जिससे कि रचना का मूल जन्म ना हो।
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पहले प्रकाशित : 8 अक्टूबर, 2023, 11:47 IST
