सौरभ तिवारी/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों का झुंड पाया जाता है। देखा गया यह झुंड कभी-कभी राज्य की सीमा पार करके अन्य राज्यों में भी चला जाता है, और वापस फिर लौट आता है. वन विभाग के अनुसार, इन हाथों की सवारी का एक पैटर्न है, ऐसा ही एक हाथियों का झुंड मध्य प्रदेश में था, जिसमें से 3 हाथी वापस छत्तीसगढ़ प्रवेश कर चुके हैं।
यह जंगली हाथियों के विचरण से हाथियों और इंसानों के बीच के मिश्रण की स्थिति उत्पन्न हो रही है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि हाथियों और उपयोगकर्ताओं के बीच टकराव होता है, जिससे दोनों को नुकसान पहुंचता है. कई बार हैंडीज़ ने आद्योपांत के घरों को नष्ट कर दिया है।
गजरथ से अद्यतन जागरूकता
इस समस्या को लेकर गजरथ के ओर से हाथियों के विचरण क्षेत्र में रहने वाले आध्यात्म की समीक्षा करने का प्रयास किया जा रहा है। हाथियों से लेकर आरक्षण के स्मारक तक के बारे में समीक्षा करने के लिए मुनादी की जा रही है, और इसके लिए ग्राफिक्स का उपयोग किया जा रहा है। इन ब्रांडों में लॉडस्पीकर लगा है, जिसके माध्यम से आद्योपांत को मना किया जा रहा है। साथ ही, रीयल्टी को अंतिम चरण की समझ भी दी जा रही है।
हाथियों पर रख जा रही निगरानी
इस समस्या के समाधान के लिए मर्फी वनमंडल अमला से भी सलाह ली गई है, और छूट को छोड़ने के लिए गजरथ के नाम से 2-2 गाजर छोड़े जा रहे हैं। इन घूमने वाले वन अमले के लोगों के अवशेषों को हाथियों के दर्शन के साथ खंडहरों के बारे में बता रहे हैं, और उन्हें हाथियों से मुक्ति के बारे में सलाहकारों में शामिल कर रहे हैं। साथ ही, वन अमले ने हाथियों पर निगरानी की निगरानी भी बढ़ा दी है।
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पहले प्रकाशित : 9 अक्टूबर, 2023, 16:18 IST
