अनूप/कोरबाः भारत सरकार द्वारा विशेष संरक्षित मंदिरों को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रकार की योजनाएं शुरू की जा रही हैं। इस तरह की जनजाति कोरबा जिले में भी मौजूद हैं। पहाड़ी कोरवा, बिरहोर और पांडो जन जातीय परिवार के मामले में सरकारी दुआएं तो दी जा रही हैं, लेकिन नौकरी का मामला अटका हुआ है. मिडिल हो या हीरे की शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा नौकरी के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कोरबा जिले का नाम ही कोरबा जनजाति का नाम है, कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा जाति के लोग आज भी गुजरात बसर कर रहे हैं। कोरवा जनजाति जनजाति को राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र का पद प्राप्त है। राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार जनजाति के पढ़े लिखे लोगों को जिला स्तर पर संवैधानिक सेवाओं में आगे बढ़ाने के लिए विशेष भर्ती के लिए मानक दिया गया है। इसके बावजूद जनजाति वर्ग के बच्चे पढ़ रहे हैं।
करीब 160 छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ
ऐसे ही कुछ कोरवा युवा जनजाति वर्ग के बच्चों ने कोरबा के डॉक्टर्स ऑफिस में अपना नाम दर्ज कराया है। वहीं युवाओं का कहना है कि समाज कल्याण विभाग उनकी जाति के करीब है 160 पढ़ें युवा युवतियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है, जिस कारण से भी अभी तक नौकरी के लिए भटक रहे हैं।
इस विषय में विशेष रूप से पिछड़े जनजाति पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समाज कल्याण समिति द्वारा भी मांग की गई है कि जल्द ही छूटे हुए लोगों का नाम सूची में शामिल होने की मांग की गई है।
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पहले प्रकाशित : 9 अक्टूबर, 2023, 15:15 IST
