उत्तर
जो लोग सुबह से लेकर दोपहर तक घर के सामान में ज्यादा शामिल थे, उनमें बीमारियों का खतरा कम था।
सुबह और दोपहर में चंचलता सक्रियता के खतरे को कम करता है।
सुबह व्यायाम से मधुमेह का खतरा कम: भारत में श्रमिकों की स्थिति बहुत ही खस्ताहाल है। मद्रास डायबिट्स रिचर्स फाउंडेशन और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जो कि बेहद तेजतर्रार है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10.1 करोड़ लोग पीड़ितों से हैं जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक हैं। इसका मतलब यह है कि हर सौ में करीब 9 लोग काम करते हैं और बाकी जगहों पर ज्यादातर को आने वाली कुछ गर्मियों में झड़प होने वाली है। इतनी ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की बहुसंख्यक आबादी किसी न किसी तरह के मेटोबॉलिक डिसऑर्डर का शिकार है। मेटाबोलिक विकार में रक्तचाप, उच्च रक्तचाप, मोटापा, पेट के पास चर्बी और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। विद्रूप की बात यह है कि इन सभी मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के लिए लाइफस्टाइल खराब और खान-पान जिम्मेदार है। इसलिए ग्लोबल डायबीटीज कंपनी ने एक अध्ययन के आधार पर बताया कि मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए किस समय फिजियोलॉजी की सबसे अधिक आवश्यकता है।
नियमित रूप से प्लास्टिक सक्रियता आवश्यक
नए अध्ययन में पाया गया कि साक्षात्कार करने की टाइमिंग और टाइप 2 साक्षात्कार के जोखिम को कम करने के बीच सीधा संबंध है। अध्ययन के परिणाम में यह पाया गया कि यदि आप सुबह और दो बजे से ही नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं तो टाइप 2 नशे का खतरा बहुत कम हो जाएगा। इससे पहले भी एक अध्ययन में पाया गया था कि बच्चों में कम उम्र में ही मौत की आशंका जताई जाती है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की टीम ने इस अध्ययन का परिणाम दिया है। इसमें 93 हजार लोगों का डेटा शामिल है और उनके सहयोगियों और मेहमानों के बीच समय-समय पर खरीदारी की जाती है। इन लोगों की औसत आयु 62 वर्ष थी.
कठिन परिश्रम की आवश्यकता नहीं
अध्ययन में पाया गया कि जो लोग सुबह से लेकर दो बजे तक घर के दोस्तों में ज्यादा व्यस्त थे या बहुत कठिन काम करते थे, उन लोगों में शाम को खाने वालों की तुलना में कमाई कम हो गई। इन लोगों में 10 प्रतिशत तक आतंकवादियों का ख़तरा कम पाया गया। स्टडी का लब्बोलुआब यह था कि कठिन मधुमेह से खतरे को टाला जा सकता है और मधुमेह होने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है। अध्ययन के एक लेखक ने बताया कि दूसरे शब्दों में कहा गया है कि जिन लोगों ने बेशक कम मेहनत वाली चीज की, लेकिन बहुत जल्दी-जल्दी की, उन लोगों में मजदूरों का खतरा बहुत कम था। यानी सिर्फ एक बार कड़ी मेहनत करो तो इससे खतरा कम नहीं होता बल्कि लगातार मरीज की जरूरत होती है और इसका सही समय सुबह से दो बजे के बीच होता है।
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पहले प्रकाशित : 12 अक्टूबर, 2023, 18:41 IST
