Homeमनोरंजनलाल मुली: सूजन-दर्द का होता है सफाया, एंटीऑक्सिडेंट से परिपूर्ण, ब्लड शुगर...

लाल मुली: सूजन-दर्द का होता है सफाया, एंटीऑक्सिडेंट से परिपूर्ण, ब्लड शुगर को लिखा नियंत्रण में


मधुमेह रोगियों और लीवर की समस्या के लिए लाल मूली के स्वास्थ्य लाभ: सर्दीयों को दूर करने के लिए हरी व हरी मिर्च का सेवन शुरू कर दें। ये मूली लोगों को बेहद प्रिय हैं। इने तो लाल मूली भी बहुत आने लगी है. इसे आम मूली से सबसे अधिक स्वादिष्ट व रासायनिक माना जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट तो है ही, इसके सेवन से ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जाता है, साथ ही शरीर की विषाक्तता (डिटॉक्सिफाइड) को भी बाहर निकाला जाता है। दिलचस्प है लाल मूली का इतिहास।

लाल मूली बाहर से लाल लेकिन अंदर से सफेद होती है

लाल मूली (लाल मूली) को लेकर लोगों का रुझान बढ़ गया है। यह देखने में सामान्य मूली से अधिक खूबसूरत व आकर्षक नजर आती है। यह आम मूली की तरह लंबा या शलजम की तरह का गोल भी होता है। इसका साहिल, सामुद्रिक और समुच्चय होता है, जिसका रंग चमकीला लाल, लाल-काफी होता है। खास बात यह है कि इसके अंदर का गूदा सफेद, स्टफी, पानी से भरा होता है लेकिन कुरकुरा होता है। जब यह पीतल का पौधा होता है तो इसका स्वाद हल्की सी हो जाता है, इसके बाद इसका तीखा और चटपटा हो जाता है। लाल मूली के पत्ते भी आम मूली से अधिक स्वादिष्ट होते हैं और उनमें पौष तत्व भी आम मूली से अधिक स्वादिष्ट होते हैं। आपने देखा कि अब सब्जी मंडी में सफेद मुली के साथ लाल मुली की आमद भी बहुत होने लगी है, क्योंकि इसके स्वाद को लोग पहचानने लगे हैं। (अमेरिकी फल है क्रेनबेरी, दिल के स्वाद और यूटीआई में)

पूरी दुनिया में ओबाई जाती है लॉन्ग व गोल लाल मूली

ऐसा माना जाता है कि मूली का निर्माण हजारों हजारों से हो रहा है और इसका प्राथमिक सिद्धांत भारत व चीन से है। अमेरिकी भारतीय वनस्पति विज्ञान सामासथानी ने इसके दो उत्पत्ति केंद्र वर्णित हैं, जिनमें से एक चीन और दक्षिण पूर्व एशिया है, जिसमें चीन, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम आदि देश हैं। दूसरी उत्पत्ति स्थल इंडो-बर्मा उपकेंद्र है, जिसमें भारत और म्यांमार शामिल हैं। भारत में हजारों वर्ष पहले लिखित औषधि ‘चरकसंहिता’ में भी मूली (मूलकं) का वर्णन है। इसके त्रिदोषनाशक (कफ-वात-पित्त) के बारे में बताया गया है। दूसरी ओर ऐसा भी कहा जाता है कि प्राचीन काल में भी लाल मूली की खेती की जाती थी लेकिन इसकी विशेष खेती नहीं की जाती थी। यह शलजम, चुकंदर की खेती के साथ ही कुछ लाल मुली भी उगी थी। शाकाहारी इतिहासकारों का मानना ​​है कि लाल मूली की उत्पत्ति आधिकारिक तौर पर 16वीं शताब्दी में डच और इटालियन किसानों ने शुरू की थी। उसके बाद यह उत्तरी अमेरिका, मैक्सिको और कैरेबियन द्वीप समूह हैं। आज लाल मूली की सलामत दुनिया भर में उगी हुई हैं।

ICAR ने इसे एंटीऑक्सीडेंट से पूर्णता माना है

लाल मूली को शरीर के लिए बेहद गुणकारी माना जाता है। भारतीय अनुसंधान कृषि संस्थान (ICAR) का कहना है कि लाल मूली के भोजन के लिए तो लाजवाब है, इसमें सामान्य मूली की तुलना में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर 80-100 प्रतिशत अधिक है। इसका अर्थ यह है कि लाल मूली शरीर की कोशिका (कोशिका) का संचयन अधिक मात्रा में करना है। संस्थान के अनुसार लाल मूली में एंथोसाइनिन (एंथोसाइनिन) भी पाया जाता है, जिसमें ब्ल्ड शुगर को नियंत्रित करने के गुण होते हैं। इसमें फेनोलिक्स (Fenolax) भी मौजूद होता है, जो सूजन व दर्द को कम करने में भूमिका निभाता है। (उदाहरण के लिए, स्टॉकहोम के पत्ते, हार्ट को बनाए रखें)

पीलिया के रहस्य को दूर किया जा सकता है

फूड बेकरी और होमशेफ सिम्मी बब्बर का कहना है कि लाल मूली को भी लीवर के लिए गुणकारी माना जाता है। यह पीलिया के रहस्य को दूर कर सकता है। मोटे खाद्य पदार्थ और कार्बोहाइड्रेट में होता है, इसलिए पाचन तंत्र को भी मापने की कोशिश की जाती है। लाल मूली में लाल मूली न केवल केक के पौधों में स्वाद व्यापारी है बल्कि यह भूख को भी शांत करने में मदद करता है। फैट नहीं होता है और कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट सीमित होता है, जिससे शरीर का वजन नहीं बढ़ता है। आमतौर पर लाल मूली का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, लेकिन बेहतर होगा कि इसे रात के खाने में कच्चे केक के रूप में शामिल करने से बचाया जाए। रात को नियमित सेवन से यह कफ बनाया जा सकता है।

टैग: खाना, स्वास्थ्य, सब्ज़ी



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img