मंदिर की ये है मान्यता
मंदिर के पुजारी संजय यादव ने बताया कि, यह मंदिर 1400 ई. यानी 700 साल पुराना है. यहां पर भी भक्त आते हैं, सभी के मंत्र दर्शन माता से पूर्ण हो जाते हैं। माँ दंतेश्वरी कभी-कभी अपने भक्तों को खाली हाथ नहीं भेजती हैं। यहां से शुरू होती है पारंपरिक चला आ रही है, इस मंदिर में जो भी पुजारी होगा वह यादव ही होगा। यहां पहले जंगल हुआ था. यहाँ पर ग्लवले चराते थे. जहां माता रानी की क्रीड़ा स्थली वहां पर गाय दूध की दुकानें थीं। ग्वाला को मां दंतेश्वरी का सपना आया कि मैं यहां रेस्तरां हूं। लेकिन ये बात किसी को मत बताना. इतनी बड़ी माता रानी सपने से चलीं। ग्वाला परेशान हो गया और घर वालों को पता चला कि फिर इस जगह की खुदाई हुई और दंत मांेश्वरी प्रकट हुईं। फिर यहीं स्थापित किया गया है. नवरात्रि में यहां न केवल छत्तीसगढ़ के भक्त आते हैं वरन् मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे अन्य प्रदेश सहित सांख्यिकी से भी भक्त आते हैं।
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पहले प्रकाशित : 13 अक्टूबर, 2023, 11:20 IST
