अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर। वेस्ट सरहद पर स्टेट सोसायटी का जायका आर्टिस्ट तक अपना ढाक जमा चुका है। शायद यही वजह है कि यहां बनने वाले जयाका के पोस्टर काफी पसंद किए जाते हैं। ऐसा ही एक जायका है गदरारोड के लोधी का। इनमें लौध में उड़द की दाल, बेक्टी मावा, देशी घी, शक़्कर, सोना, खसखस और मेवे की दाल बनाई जाती है.
थार के लजीज और स्वाद का परिचय देने जा रहे हैं गदरा के लोध। इन लोध को भारत में तो पसंद ही किया जा रहा है। इसे पाकिस्तान के अलावा न्यूजीलैंड, अमेरिका, लंदन और मुंबई में भी काफी पसंद किया जा रहा है। इनमें लौध में उड़द की दाल, बेक्टी मावा, देशी घी, शक़्कर, सोना, खसखस और मेवे की दाल बनाई जाती है. इस तरह के लोध का निर्माण की विधि अन्य जगह नहीं होने से यहां का लोध प्रसिद्ध है। इसके निर्माण में एक पूरे परिवार को सफलता मिली है।
अमोलख स्वीट्स के ऑनर शेखर भूत-कर्मचारी हैं कि यह लोध फ्लाड की दाल से बनता है। इनमें खसखस, नारियल मावा, शक्र, देशी घी, ड्रूगी चिप्स, गौंद को मिलाकर बनाया जाता है। यहां के लोध अमेरिका, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, लंदन और मुंबई भी जाते हैं।
उन्होंने 5 किलों के गियर की पढ़ाई शुरू की है। आटा के अंदर घी और दूध का मिश्रण ग्राहकों की मोगरी बनाई जाती है। इसके बाद के वीडियो में घी व गौंद को शामिल किया गया है। गोंद को भुनने के बाद इसमें आटा डाला जाता है. आटे के बर्तनों के बाद खासखस, चिप्स के नमूने मिलते हैं।
उन्होंने लिखा है कि इसके बाद चाशनी के आटे, खसखस और गोंद से बने मसाले का मिश्रण बनाया जाता है। इसके बाद नामांकित 10-12 डेमोक्रेट तक को ठंडा किया जाता है और फिर लोध लोगों को जायका तक ठंडा किया जाता है। इतना ही नहीं यह 15 दिन तक बुरा नहीं होता है।
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पहले प्रकाशित : 14 अक्टूबर, 2023, 12:15 IST
