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सावधान! किसी की कॉल रिकार्डिंग पैड भारी, उच्च न्यायालय का अहम निर्णय हो सकता है


आप भी तो कॉल फ़ोन रिकॉर्ड नहीं करते? यह आदत परेशानी में डाल सकती है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति की बातचीत के रिकॉर्ड के बिना ‘निजता के अधिकार’ (निजता का अधिकार) का उल्लंघन है। उच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे (जस्टिस राकेश मोहन पांडे) ने कहा कि संबंधित व्यक्ति की सामग्री के बिना उनकी बातचीत रिकॉर्डिंग संविधान के 21 का उल्लंघन है।

पूरा मामला क्या है?
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय गुजरात बोचा से जुड़े एक मामले की सुनवाई चल रही थी। इस केस में फैमिली कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी से बातचीत की रिकॉर्डिंग के तौर पर पेश करने की इजाजत दी थी। हाईकोर्ट ने महासमुंद के फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। असल में, दादाजी (पत्नी) ने पति से गुजराती बोके के लिए वर्ष 2019 में महासमुंद के जिला न्यायालय में आवेदन किया था और संबंधित दार्शनिक साक्ष्य अदालत में पेश किया गया था।

पति क्यों सुनना चाहते थे पत्नी की रिकॉर्डिंग?
दूसरी ओर, प्रतिवादी (पति) ने दादाजी (पत्नी) के चरित्र पर संदेह के आधार पर गुजराता भाईचारा से मना कर दिया था। उन्होंने कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दाखिल किया और कहा कि उनके मोबाइल फोन पर लिविंग की बातचीत रिकॉर्ड की गई है। प्रतिवादी (पति) उक्ति बातचीत के आधार पर अदालत के साथ बातचीत जिरह करना चाहती है। अदालत ने उक्त आवेदन को स्वीकार कर लिया और मंजूरी दे दी।

महिला ने क्या डेली दी?
पारिवारिक अदालत के इस आदेश के बाद महिला ने 21 अक्टूबर 2021 को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और फोन पर असिस्टेंट प्रोफेसर पेशगी के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। महिला की लापरवाही थी कि यह उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। गुड़गांव के वकील ने बताया कि फ़ैमिली कोर्ट ने कॉल रिकॉर्डिंग पेश करने की अनुमति कानूनी ग़लती से दी है। बिक्री की जानकारी के बिना प्रतिवादियों द्वारा बातचीत रिकॉर्ड की गई थी, इसलिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय का निर्णय
दोनों स्टार्स के डीजल साउंड के बाद रिपब्लिक राकेश मोहन पैंडेल के सिंगल प्रिंट ने महासमुंद परिवार कोर्ट द्वारा 21 अक्टूबर 2021 को रद्द करने का आदेश दिया। अदालत का मानना ​​है कि किसी भी व्यक्ति की बातचीत को रिकार्ड किए बिना करना कानून का उल्लंघन है।

टैग: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, चल दूरभाष



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