मनीषपुरी/भरतपुर.इजराइल-हमास युद्ध के बीच चल रहे युद्ध में कई देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं। हालाँकि, भारत सरकार अपनी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान कर रही है। लौट रहे इन लोगों में अब घर भी खतरे में हैं। ऐसे ही छात्र हैं अंकित शर्मा जो हाल ही में जूनागढ़ में स्थित हैं। युद्ध के मंज़र से अब तक ख़तरे में हैं।
सायरन की आवाज से डर गए
विक्रम ने सायरन को बताया कि वह आश्चर्यचकित शेल्टर में घुसे हुए थे। यह युद्ध किसी दुर्दान्त कथा से कम नहीं है। अंकित शर्मा ने बताया कि वे युद्ध होने पर तीन वास्तविक थे कि सपने में भी उन्हें बजाते सायरन की आवाज सुनाई दी थी। ओपेक एरियल यूनिवर्सिटी मे कैंसर पर इज़राइल के वेस्ट बैंक में शोध कर रहे हैं। अंकित ने बताया कि वे गाजा पट्टी से 100 किलोमीटर दूर रह रहे थे।
पता नहीं कब गिर जाए मिसाइल
प्रशिक्षुओं को लगता है कि युद्ध के दौरान वे जीवित थे कि क्या पता चला कि उनके ऊपर कब मिसाइल गिरी थी। हालाँकि जहाँ युद्ध चल रहा था, वह गाजा में था, लेकिन युद्ध के अवशेष मस्तिष्क में बिखर गए थे। एरियल यूनिवर्सिटी ने युद्ध को देखते हुए बॉम्ब शेल्टर बनाया था। जैसे ही सायरन की आवाज आई तभी इन शेल्टर की शरण में चले गए थे। इस दौरान सायरन बजने के 10 सेकंड के अंदर शेल्टर में जाना पड़ा।
पत्नी व बच्चों को ले जाने की थी तैयारी
ओमप्रिया शर्मा ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बेटी को ले जाने के लिए साजिर की तैयारी कर ली थी। लेकिन युद्ध की वजह से अभी कैंसिल करा दिया गया है। जब तक शांति नहीं होती तब तक जाने का कोई इरादा नहीं है। अंकित शर्मा के पिता रेशम शर्मा राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय में सहायक प्राधिकारी सेवानिवृत्त हैं।
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पहले प्रकाशित : 16 अक्टूबर, 2023, 08:41 IST
