पवन सिंह/कुँवर पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला रामकरेला की सब्जी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है बल्कि यह औषधीय गुणों से भी भरपूर होती है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली तरह-तरह के साइंटिस्ट खाने में स्वादिष्ट होते हैं, वैसे ही औषधीय गुणों वाले भी धनी होते हैं। उत्तराखंड पर्वत की संस्कृति के साथ ही यहां के खान-पान की बात ही अलग है। यहां के अनाज तो गुणवत्ता की खान हैं. यहां की केकेरी भी नाममात्र की शख्सियतों से भरी हुई हैं। ऐसी ही एक हरी सब्जी है रामकरेला जिसे पहाड़ी करेला कहते हैं, रामकरेली और मीठा करेला भी बजता है. इसके वैज्ञानिक का नाम सिलेंथरा पेडाटा स्कार्ड है।
पहाड़ी रामकरेला में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को पुनः प्राप्त करता है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी शामिल हैं। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह शुगर और हाई ब्लड की कमी को भी ठीक रखता है।
रामबाण के लिए कई विकल्प
यहां के निवासी किसान आनंद सिंह का कहना है कि रामकरेला की सब्जी पहाड़ी इलाके में है। ये सब्जियां वहां होती हैं, जहां ठंड सबसे ज्यादा होती है. इसकी सब्जी खाने से बॉडी फिट रहती है। ज्यादातर इस सब्जी को जड़ी-बूटियों में खाया जाता है क्योंकि यह काफी गर्म होती है, जिससे शरीर में गर्माहट बनी रहती है। साथ ही अमिरित सुखाकर भी रखा जाता है, जो औषधि के रूप में काम करता है। इस सब्जी में भी ये सब्जी आपको आसानी से मिल जाएगी. जो लोग इस सब्जी की समीक्षा जानते हैं, वह लोग इस सब्जी को बड़े चाव से खाते हैं। आगे उन्होंने कहा कि रामकरेला की खास बात यह है कि कम मेहनत में इसका उत्पादन ज्यादा होता है।
कई तत्व मौजूद
इसमें कीट और चैलेंज का प्रकोप भी नगण्य रहता है। पहाड़ में सितंबर के तीसरे सप्ताह से लेकर एवेअर अंत तक रामकरेले का उत्पादन होता है। कम कीमत में ज्यादा फायदे देने वाले राम करेले में एंटीऑक्सीडेंट, आयरन और रक्त साफ करने वाले तत्व मौजूद हैं।
क्या है ये सब्जी के फ़ायदे
रामकरेला का रस उच्च रक्तचाप के अलावा खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को भी ठीक करता है। यह धमनी रोग, संचारी रोग और शुगर के इलाज में भी शामिल है। जहां कड़वा करेला बैक्टीरिया का शत्रु है, वहीं मीठा करेला भी कीटनाशकों की औषधि है। मीठा करेला सभी प्रकार के त्वचा रोग और जलन में भी उपयोगी है। इसका रिज़ल्ट का रस पेट के कीड़ों को मारने वाला सहायक है। इसका स्वरस कील-मुहांसन को ठीक करने के लिए भी काम किया जाता है, जबकि इसके जड़ को सुखाकर बनाए गए केल्स का लेप चार्म उपकरणों के लिए बहुत उपयोगी है।
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पहले प्रकाशित : 17 अक्टूबर, 2023, 17:08 IST
