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आपके बच्चे को भी लग गया है फोन की लत, अवसाद का हो सकता है शिकार, अपनाएं 5 तरीके, मोबाइल की तरफ भी नहीं देखेगा


उत्तर

बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना बेहद जरूरी है।
डिजिटल एक्सपोजर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

बच्चों की स्मार्टफोन की लत से कैसे छुटकारा पाएं: आज के दौर में ज्यादातर बच्चों के उपकरण, टैबलेट और लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का जमकर इस्तेमाल किया जाता है। कम उम्र के बच्चों की सेहत पर काफी असर पड़ता है। टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चों को इसकी लत लग जाती है और वे बिना मोबाइल के खाना भी नहीं खाते हैं। हालांकि ऐसा करना बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। टेक्नोलॉजी, गैजेट्स और डिजिटल प्लेग्राउंड की भरमार से बच्चों में एंजाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों के लिए डिजिटल अध्ययन से गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। इससे न केवल कम उम्र में उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी नींद की प्रवृत्ति और चिंता का स्तर भी प्रभावित हो रहा है। इससे बच्चों में अवसाद का खतरा भी बढ़ रहा है।

युनाइटेड वी केयर की चारित्रिक संस्था डॉ. वसुधा अग्रवाल एंजाइटी के अनुसार एक परेशान करने वाली भावना है, जिसमें लोग हर वक्त सोचते हैं कि कुछ ठीक नहीं है, वैसे ही सब कुछ ठीक है। एंजाइटी से पीड़ित होने पर ऐसा लगता है जैसे अचानक कुछ खतरनाक होने वाला है। ऐसे कंडीशन में लोगों के दिल की नज़र तेज़ हो जाती है, ऐशे पर खाना आ जाता है, शरीर कांपने लगता है और स्ट्रेस में तनाव जैसे लक्षण नज़र आने लगते हैं। यदि समय रहते एंजाइटी को नियंत्रित न किया जाए, तो यह अवसाद का रूप ले सकता है। आजकल बच्चों में कोटेक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आदत लग रही है, जिससे उन्हें एंजाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है। इससे बच्चों की मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप रैन पेरेंट्स बच्चों की इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। बच्चों की ग़लत आदत को आदर्श बनाने के लिए माता-पिता को सभी प्रयास करने चाहिए।

इस तरह के सिद्धांत बच्चों की मोबाइल की आदतें

डॉ. वसुधा अग्रवाल का कहना है कि सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों की डिजिटल पढ़ाई की सीमा तय करें, जो बच्चे बच्चों की सेहत पर असर डालते हैं, उन्हें बच्चों को नहीं देखना चाहिए। यह पेरेंट्स की जिम्मेदारी है. बच्चों के डिजिटल एक्सपोजर का समय कम कर दें। इसके अलावा बच्चों की प्राथमिकताएं, ताकि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर हो सके। बच्चों को दिखावे के लिए मोबाइल की लैपटॉप स्टाइल दिखाएं। बाहरी बच्चों को महत्वपूर्ण संकट में शामिल करने के लिए प्रेरित करें, जिससे उनकी विकलांगता बढ़े। हमारे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करना चाहिए। इससे आप बच्चों की मोबाइल की आदत छुड़वा देंगे और उनका स्वास्थ्य बेहतर कर पाएंगे।

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बच्चों को खूब प्यार करो और फ्रैंक बातें करो

डॉ. वसुधा अग्रवाल के अनुसार बच्चों को बहुत प्यार और दुलार देकर आप उनके गलत अर्थ को छुड़वा सकते हैं। आप बच्चों के मन में हुनने की कोशिश करें और फ्रैंक से बात करें। इससे बच्चा आपसे अपनी परेशानी साझा कर लेगा और आपको पालन-पोषण में काफी मदद मिलेगी। सभी अभिभावकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए और उनकी बेहतर योजना बनाने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों को आप फ़्रैंक होटल और सही रास्ते पर ले जाएँ। इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा और वे सही गलत का निर्णय कर पाएंगे।

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