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चंद्रयान-3: चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के 2 दिन बाद ही इसरो में फंस गया था पेच मगर…जानें क्या हुआ था?


नई दिल्ली: खैर ही चांद पर विक्रम और प्रज्ञान चेन की नींद सो रहे हैं, मगर इसरो का मिशन चंद्रयान-3 अब तक पूरी तरह से सफल हो रहा है। चंद्रयान-3 से इसरो और भारत को जो प्लांट वैली, विक्रम और प्रज्ञान ने स्लीप मोड में जाने से पहले कर दिखाया है। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि चंद्रयान-3 पूरी तरह से सफल रहा था, मगर चांद के प्रक्षेपण के दो दिन बाद ही रोवर मिशन के साथ कुछ तकनीकी उद्यम किए गए थे, जिससे इसरो के वैज्ञानिक लक्ष्य तय किए गए थे। असल में, मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चंद्रमा पर प्रक्षेपण के बाद चंद्रयान-3 के रोवर अंतरिक्षयान में लगे एक अहम पेलोड ने कुछ क्षण के लिए काम बंद कर दिया था। हालाँकि, बाद में यह तुरंत ठीक हो गया और इस तरह चंद्रयान-3 मिशन अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, चंद्रमा पर विक्रम के जहाज और रोवर अंतरिक्षयान के चंद्रयान-3 से दो दिन बाद 25 अगस्त को रोवर पर लगे समागम में से एक में क्षणिक ब्लैक आउट हो गया था। चंद्रयान-3 के रोवर पर अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (पीएएक्सएस) के प्रमुख चांजकर्ता संतोष वडावले ने कहा कि रोवर पर एक बंद उपकरण लगा था। जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि यह रेज़्यूमे रोवर संसाइडेरेशन को देर से जोड़ने का कारण था। इस जांच में एपीएक्सएस का कमांड बंद हो गया। इसके तुरंत बाद यह रकम ठीक हो गई, जिसके बाद उपकरण ने चांद की मिट्टी और चश्मे का दोष चांद पर ही जांच शुरू कर दी।

चंद्रयान-3 समाचार: चंद्रमा पर सो रहे विक्रम-प्रज्ञान का अब क्या होगा, किस खतरे का है डर? चंद्रयान-3 से इसरो को अब भी यही उम्मीद है

चंद्रयान-3 के पेलोड ने शानदार काम किया
चंद्रयान-3 वैज्ञानिक टीम का हिस्सा रहे संतोष वडावले ने कहा कि विक्रम लैंडर और अंतरिक्षयान रोवर को चांद पर कभी भी जगने के प्रोजेक्ट से डिजाइन नहीं किया गया था। इसरो की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) में काम करने वाले वैज्ञानिक संतोष वडावले ने उन रिपोर्टों में कहा है कि 22 सितंबर को दूसरे चंद्र दिवस की सुबह, इसरो की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वे इसरो से खारिज कर दिए गए थे। के बाद नहीं जाग पाए थे. इस पर उन्होंने कहा कि रोवर और लैंडर को जगने की चुनौती नहीं दी गई थी। उनका अनुमान है कि भारत का चंद्रमा मिशन पूरी तरह से सफल हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि चंद्रयान -3 पेलोड ने उत्कृष्ट वैज्ञानिक डेटा प्रदान किया है और एपीएक्सएक्स ने शानदार जानकारी दी है, जिसका विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है।

इसरो प्रमुख ने रोवर और लैंडर पर क्या कहा?
वहीं, इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष एस. सोमन ने गुरुवार को कहा था कि चंद्रयान-3 का रोवर ‘प्रज्ञान’ चंद्रमा की सतह पर सुप्तावस्था में है, लेकिन फिर भी इसके सक्रिय होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सोनम ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी इस से भली-भांति बात करती है कि रोवर और लैंडर ‘विक्रम’ चंद्रमा की सतह पर सुप्तावस्था या निश्चक्रय सतह पर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘चंद्रयान-3’ मिशन का उद्देश्य ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ था और इसके बाद अगले 14 दिन तक प्रयोग किए गए और सभी जरूरी दस्तावेज जुटा लिए गए हैं.

चंद्रयान-3 का उद्देश्य पूरा हुआ
चंद्रयान-3 के विक्रम और प्रज्ञान को लेकर सोमन ने कहा कि अब वहां शांति बनी हुई है…इससे अच्छे से सोने दो..हम चिंता न करें…जब यह आप उठेंगे तो उठोगे…मैं अभी इसके बारे में बताता हूं यही कहना चाहता हूँ. यह पूछे जाने पर कि इसरो को अब भी उम्मीद है कि रोवर फिर से सक्रिय हो जाएगा, उन्होंने कहा कि उम्मीद बनाए रखने का कारण है। उन्होंने अपनी ‘उम्मीद’ के कारण लिखा कि इस मिशन में एक लैंडर और एक रोवर शामिल थे। उन्होंने बताया कि चौधरी लैंडर एक विशाल संरचना है, इसलिए इसका पूरी तरह से परीक्षण नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3′ मिशन का उद्देश्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसरो मिशन के माध्यम से एकत्रित वैज्ञानिक डेटा का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

चंद्रयान-3: चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के 2 दिन बाद ही इसरो में फंस गया था पेच मगर...जानें क्या हुआ था?

23 सितम्बर को चन्द्रयान-3 का प्रक्षेपण हुआ
बता दें कि इसी साल 23 अगस्त को चंद्रमा पर उतरने के बाद लैंडर और रोवर और पेलोड ने एक के बाद एक प्रयोग किया था ताकि उन्हें 14 पृथ्वी दिवस (एक चंद्र दिवस) के अंदर पूरा किया जा सके। चंद्रमा पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है। पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा पर रात की शुरुआत से पहले, लैंडर और रोवर दोनों क्रमशः चार और दो सितंबर को सुप्तावस्था या निश्चक्रय अवस्था (स्लिप मोड) में चले गए थे। इसरो ने 22 सितंबर को कहा था कि उसने अपने चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ के लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ के साथ संपर्क बनाने का प्रयास किया है, ताकि उनकी सक्रियता की स्थिति का पता लगाया जा सके लेकिन अभी तक हमारा कोई संकेत नहीं मिला है.

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