निःसंदेह बड़कुल/दमोह. मप्र के तटीय क्षेत्र के धार्मिक स्थलों को पकड़ लिया गया है, यही कारण है कि यहां के लोग धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार ही कार्य को अहमियत देते हैं। कोई भी व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, दस इमली, तीन, तीन बेल, तीन क्लब और पांच आम के पेड़ लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता। हिन्दू धर्म में वृक्षों का वास माना जाता है। इन्ही में से एक पेड़ अर्जुन का है जो पूजनीय है तो उसकी ही औषधि औषधि मानी जाती है। इसमें एंटीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण, गले का खराश, शीतोष्ण उदाहरण के लिए को दूर करने में मदद करते हैं।
रामबाण औषधि के लिए दिल के खोज
आयुर्वेद में अर्जुन के छात्र दिल के लिए एक असरकारक औषधि है, जिसका अर्थ है कि यह आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका अर्थ है कि यह आयुर्वेदिक औषधि है। . दिल को रक्त की दवा से काम करने का मौका मिलता है, जिस किसी को कई बार हार्ट अटैक आने का भी खतरा रहता है ऐसे में दिल को रोजाना अर्जुन की छाती से काम लेना चाहिए।
मुंह के छाले को कर दूंगा दूर
यह वृक्ष पूजनीय है तो इसके पत्ते, पत्तियाँ और पुतले भी पेट में होने वाली ख्वाहिशों को साफ कर देते हैं। इसकी तासीर अनोखी होती है, जिस कारण यह पेट में रिवाल्वर वाली गर्म गैस को ठंडा कर देती है और मुंह में चली नहीं जाती। इसके अलावा यह खून को रसायन औषधि के रूप में प्राकृतिक रूप से नमक बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। हाई ब्लड प्रॉब्लम की समस्या वाले मरीज इसका सेवन कर सकते हैं।
आयुर्वेदिक डॉ. ब्रजेश कुलपारिया ने बताया कि अर्जुन का पेड़ अमूमन हर जगह पाया जाता है। खासतौर पर जंगल के जंगलों में यह पेड़ आसानी से मिल जाता है। आमतौर पर इसे टर्मिनलिया अर्जुन के नाम से जाना जाता है। इसके चेल्सी का उपयोग दिल के बर्तनों में किया जाता है। हृदय से संबंधित किसी भी बीमारी के लिए यह उपाय संभव हो सकता है। बीपी को नियंत्रित करना, ब्लड सरक को नियंत्रित करना, जिस मरीज को भी सहकर्मी, कोलेस्ट्रॉल, एंजाइटी के साथ अन्य कोई समस्या हो सकती है वह अपने छात्रों का सेवन करके उस बीमारी से पीड़ित हो सकता है।
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पहले प्रकाशित : 21 अक्टूबर, 2023, 12:43 IST
