सौरभ तिवारी/बिलासपुरः नवरात्रि का पर्व पूरे भारत में बड़े पैमाने पर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसकी भव्यता की बात करें तो कोलकाता और बंगाल में नवरात्रि का यह पर्व विशेष तरीके से मनाया जाता है, और ये पूरी दुनिया में मशहूर है. मध्य भारत की बात करें तो बिलासपुर शहर इस पर्व की भव्यता के लिए प्रसिद्ध है और पूरे मध्य भारत में नवरात्रि और दुर्गा विसर्जन का उत्सव बिलासपुर में खास रूप से होता है। यहां विसर्जन की तैयारी सुबह से शाम तक चलती है और शाम को हुंकियों का प्रदर्शन जारी रहता है, जिसका आयोजन अगली सुबह तक होता है।
बता दें कि, बिलासपुर में सुबह से ही मां दुर्गा के विसर्जन का दौर शुरू हो जाता है। हंगियों का प्रदर्शन करने वाली समितियाँ डी.जी, ढोल-तासे, और बैंड के साथ विसर्जन किया जाता है, जिस कारण सुबह से ही शहर में एक भक्तिमय तानाशाही बन जाती है। होते ही शहर की महत्वपूर्ण दुर्गा उत्सव समितियाँ अपनी मनमोहक हुनियों के साथ सिम्स चौक पर आयोजित होती हैं। रात 11 दोपहर 12 बजे से विसर्जन का दौर शुरू होता है, और सिम्स चौक से पचरी घाट तक हुंकियों के प्रदर्शन के साथ विसर्जन किया जाता है।
बिलासपुर में मनमोहक हुनियाँ बनीं
भक्त सालभर मां के मनमोहक हुंकार और उनके शक्तिमय रूप के दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं। रात होते ही भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है, और आधी रात तक यह आलम होता है कि लोगों को सड़क पर जगह नहीं मिलती।
दुर्गा विसर्जन से बिलासपुर की पहचान
दुर्गा विसर्जन अब शहर की पहचान बन गई है। साल दर साल इसका आयोजन भव्य रूप में होता रहता है। ऐसे में, दुर्गा उत्सव उत्सव के उत्साह का शहर के सामाजिक और व्यावसायिक उद्यमियों द्वारा भी स्वागत किया जाता है। विसर्जन के लिए नगर निगम द्वारा पचरी घाट में एक शानदार व्यवस्था की गई है, और विसर्जन के समय डीजे और ढोल-तासे के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की भी धूम मचती है। इसके अलावा, विसर्जन के लिए बिलासपुर में करीब 10 साल की उम्र में मशहूर डीजे भी आते हैं, जो इस खास अवसर पर लोगों को नाचने पे उतावला कर देते हैं। इस वर्ष, बिलासपुर 25 अक्टूबर को विदा हो जाएगा.
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पहले प्रकाशित : 21 अक्टूबर, 2023, 10:48 IST
