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दशहरे के दिन इस खास मिठाई की रहती है धूम, कुछ ही घंटों में एक से बढ़कर एक स्वादिष्ट होती है चैट


अनंत कुमार/गुमला. आज भले ही लोग मठ के चमचम मिठाई केक या मिल्क केक खाते हो.लेकिन जब बात त्योहार की आती है तो लोग अपने पारंपरिक मिठाई की ओर खींचे ही चले आते हैं.दरअसल, हम बात कर रहे हैं गाजा और भालू शाही मिठाई की.जो देखने के लिए के साथ-साथ खाने में भी बड़ा लजीज और स्वादिष्ट लगता है.खासकर झारखंड के गुमला शहर में विजयदशमी के दिन का दमदार शहर है.

गुमला के पालकोट रोड स्थित डुमरडीह स्थित शिव होटल में मिलने वाली स्वाद सेपरेट गाजा और बालूशाही की खूब बिक्री होती है. रावण दहन देखने आए लोग ये राक्षस जरूर खाते हैं और पैकर्स घर भी ले जाते हैं।

गाजा व शाही साम्राज्य लोगों की पहली पसंद है
शिवकुमार राय ने बताया कि हमारे यहां बहुत ही शानदार तरीके से गाजा व बालूशाही की बनाई जाती है। बिकती है। गुमला के बाहर भी लोग इसकी मांग करते हैं। हमारे यहां दोनों स्पेशल मिठाई 160 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध है।

उन्होंने आगे बताया कि गुमला के बालूशाही और गाजा पूरे झारखंड में सबसे लोकप्रिय हैं। इसका कारण यह है कि हम काफी समय से इस मिठाई को पका रहे हैं। यहां हाई क्वालिटी का मैदा और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। तो पूरा टेस्ट डाला जा सकता है। यहां के कलाकारी पिछले 40-50 साल पुराने से यह काम करते आ रहे हैं। इसी वजह से उनके हाथों में हर चीज को लेकर समेटा गया है।

50 किलो मैदा की दुकान
शिवकुमार ने बताया कि हमारे यहां गाजा व बालूशाही में 40 से 50 किलो डालडा, 12 से 15 किलो डालडा और 25 से 30 किलो चीनी के अवशेष मिलते हैं। त्योहार के समय यही हाल अन्य जगहों का भी होता है. .यहाँ का स्वाद विविधता में भी नहीं देखा जाता है.यह इतना खट्टा होता है कि मुंह में ही छेद हो जाता है.

टैग: खाना, भोजन 18, सड़क का भोजन



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