Homeहेल्थ & फिटनेसविश्व पोलियो दिवस: क्या है पोलियो की बीमारी, किस उम्र के बच्चों...

विश्व पोलियो दिवस: क्या है पोलियो की बीमारी, किस उम्र के बच्चों को होता है सबसे ज्यादा खतरा, डॉक्टर से जानें 5 बड़ी बातें


उत्तर

ऑर्केस्ट्रा की वजह से बच्चों की मांसपेशियां सप्ताह में एक बार हो सकती हैं।
कई बार रसायन शास्त्र की बीमारी भी हो सकती है।

पोलियो क्या है: बचपन में आपने भी डायनासोर की दो बूंदें जरूर पी लीं। पुरास्थल में कई दशकों से घर-घर में यूनेस्को की दवा पिलाई जा रही है। यह औषधि कम उम्र के बच्चों को पिलाई जाती है, ताकि उन्हें मसाले वाली बीमारी से बचाया जा सके। मेडिकल की भाषा में क्लासिकल को पोलियोमाइलाइटिस (पोलियोमाइलाइटिस) कहा जाता है। यह रासायनिक विषाणु के कारण वाली एक खतरनाक बीमारी है, जिससे बच्चों में अस्थमा की बीमारी हो जाती है और शरीर के कुछ हिस्से लकवाग्रस्त हो जाते हैं।

ऑस्कर्स की बीमारी 5 साल से कम उम्र के बच्चों में सबसे ज्यादा होती है। हमारे देश में डायनासोर के डायनासोर की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2014 में भारत को डायनासोर घोषित कर दिया था। स्पेक्ट्रम को ख़त्म करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 24 अक्टूबर को विश्व स्पेक्ट्रम दिवस (विश्व पोलियो दिवस) मनाया जाता है। आज इस खास बात पर डॉक्टर से जुड़े कुछ जरूरी बातें जान लें।

फोर्टिस हॉस्पिटल (ग्रेटर) के पीडियाट्रिक कंसल्टेंट डॉ. मेघनापांचाल के अनुसार यूनेस्को एक वायरल इंफेक्शन है, जो यूनेस्को वायरस की वजह से होता है। इस बीमारी की वजह से मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और पैरासिस की कंडीशन पैदा हो जाती है। नीचे से ऊपर की तरफ इसके लक्षण नजर आते हैं। इस वायरस की चपेट में आने पर बच्चे उठ न जाएं, सही से बचें और न चलें। हालाँकि भारत क्रोमाक्रोम का भुगतान हो चुका है और वर्ष 2011 में स्टोस्को का आखिरी कंफर्म केस पश्चिम बंगाल में रिपोर्ट किया गया था। हालाँकि अब भी बच्चों में इस तरह का कोई भी इंफ़ेक्शन देखने को नहीं मिलता है, तो उनका स्टूडियो डॉक्यूमेंट्री बनाई जाती है।

स्पेक्ट्रम का वीडियो क्या हो सकता है?

डॉ. मेघना पांचाल का कहना है कि स्पेक्ट्रम का सबसे ज्यादा खतरा 5 साल की उम्र के छोटे बच्चों को होता है। हालाँकि वयस्क भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। जिन स्थानों पर सैनिटरी उद्योग की कमी होती है, वहां रहने वाले लोगों को खतरा होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह खतरा होता है, क्योंकि पट्टे के दौरान महिलाओं की इम्युनिटी से समझौता होता है। कई बार गर्भवती महिलाओं के गर्भ धारण करने से उनके बच्चों को यह बीमारी हो सकती है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में रहस्य का पता लगाया जा सकता है। कंटामिन बताए गए एनी के संपर्क में आकर भी इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं। ऑनलाइन पानी से भी रसायन विज्ञान का पता लगाया जा सकता है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है।

यह भी पढ़ें- आपके बच्चे को भी लग गया है फोन की लत, अवसाद का हो सकता है शिकार, अपनाएं 5 तरीके, मोबाइल की तरफ भी नहीं देखेगा

कैसे करें क्लासिक की बीमारी से बचाव?

डॉ. मेघनाल के अनुसार, पांचाल के जीवाश्मों का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। इन बच्चों को जन्म के बाद से रसायन शास्त्र का टीका लगाया जाता है। खैर ही भारत में निर्मित होने वाला रसायन मुक्त हो चुका है, लेकिन हमारे पर्यावरण में अब भी वाइल्ड रसायन शास्त्र वायरस हो सकता है और इसका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। बच्चों को डायनासोर की वैक्सीन लगाई जानी चाहिए, ताकि इस वायरस से बचाव किया जा सके। इसके अलावा अगर बच्चे की मांसपेशियां या शरीर में कहीं भी कमजोरी या अन्य कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करें। अगर सही वक्त पर मसाला का इलाज किया जाए, तो उसे ठीक किया जा सकता है और सही समय पर इलाज से जीवनभर पारा मसाला का नौबत नहीं आएगा। हालाँकि क्लासिकल को लेकर प्रतिस्पर्धा करने से मृत्यु भी हो सकती है।

यह भी पढ़ें- उद्यम से जुड़े हुए हड्डियाँ हो अस्थि टुकड़े? ऑस्टियोपोरोसिस का हो सकता है शिकार, डॉक्टर से जानें इस बीमारी की 10 बड़ी वजहें

टैग: स्वास्थ्य, जीवन शैली, पोलियो, ट्रेंडिंग न्यूज़



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img