उत्तर
भारतीय लोगों की सबसे पसंदीदा उत्पाद कहानी है।
भारत में 11 फीसदी आबादी वाली खैनी किताबें हैं जबकि 8 फीसदी लोग बीडियां खरीदते हैं।
चैनी खैनी तम्बाकू: भारत में एक बड़ी आबादी साँप का धड़ल्ले से सेवन करती है। ये खैनी और बीड़ी लोग के पसंदीदा पिज्जा उत्पाद हैं। आपने भी देखा होगा कि खैनी की लत किस हद तक लोगों की जापान पर चढ़ जाती है कि मुंह में खैनी रखने के बाद लोग खाना-पीना भी टाल देते हैं। हाल ही में एम आई स्टैटिस्टिक्स मेट्रिक्स और डायनामिक्स फ़्लोरिडा के एक शोध के आँकड़े काफी डिलच क्लिनिक हैं जो बताते हैं कि देश में लगभग 14 करोड़ लोग नियमित रूप से हैं खैनी बिजनेस खाते हैं जबकि करीब 10 करोड़ बीड़ी में तंबाकू पी लोग जाते हैं।
हालाँकि इस शोध में भी जारी की गई है कि देश के हर वर्ग को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक सरकारी योजना जारी की गई है जिसका सबसे बड़ा लाभ खैनी खाने और बीड़ी पीने वाले लोगों को मिला है।
आईसीएमए और एम. दस्तावेज़ीकरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में करीब 28 प्रतिशत लोग सिलिकॉन आधारित फिल्मों का सेवन करते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 11 प्रतिशत लोग खैनी खाते हैं और 8 प्रतिशत लोग बीड़ी खाते हैं। इस वजह से सरकारी योजना का लाभ लेने वालों में भी पुरुषों की संख्या 42.4, महिलाओं की 14.2 प्रतिशत से अधिक है।
इस सरकारी योजना का उठाया गया लाभ
आईसीएमएसटी की रिपोर्ट बताती है कि केंद्र सरकार की लोगों को मुफ्त इलाज वाली आयुषमान भारत मेमोरियलकीम पत्रिका में गंभीर पुस्तकालयों से पीड शीट के लिए बहुत सराहना मिल रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह भी है कि इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा मिलता है लाभ खैनी या बीड़ी पीने के लिए। प्रेमियों ने लिया है. आयुष्यमान भारत स्मारकीम के तहत लाभ प्राप्त करने वालों में 70 फीसदी वे लोग हैं जो सोल्क का सेवन करते हैं। इन लोगों ने ओरल कैंसर का इलाज करने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तंबाकू का इलाज किया है।
देश में हर रोज होते हैं दो हजार मजदूर
ऑल इंडिया रेडियो डायट ऑफ मेडिकल साइंसेज में डिपार्टमेंट ऑफ रेडियो डायकोनोसिस एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में एएसआई नाम के प्रोफेसर डॉ. असहमत सिंह मलही का कहना है कि भारत में हर रोज 2000 में लोग नशे की लत से होने वाली चुनौती के बारे में जान गंवाते थे। वहीं यह चित्रांकन 13 लाख का है, जो कि टीबी, मलेरियल या गुलाम एड्स से होने वाली फिल्मों से भी दूर है। इसके बावजूद लोग ऑक्सीजन से गुरेज नहीं करते।
सरकार कर रही मोटा खर्च
डॉ. मालही का कहना है कि भारत में सिलिकॉन का पेस्ट बंद होना चाहिए। आईसीएमएसटी की एमएटीडी में बताया गया है कि टोकियो सरकार वर्क्स से रेवेनक्यू कमाती है जिसमें एलईटी हेल्थकेयर पर खर्च करना पड़ रहा है। टॉक्सिक खाने से होने वाली टॉक्सिन के इलाज में सरकार का 270 प्रतिशत खर्च हो रहा है जबकि टॉक्सिक खाने से होने वाली कमाई सिर्फ 25.9 प्रतिशत हिसासा ही है।
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पहले प्रकाशित : 26 अक्टूबर, 2023, 13:23 IST
