उत्तर
रावण का गांव ग्रेटर के सेक्टर एक के पास स्थित है।
इस गांव के प्रमुख मंदिर में रावण की मूर्ति नहीं बल्कि हनुमान जी की मूर्ति है।
रावण के गाँव में हनुमान जी: लंकेश रावण ही सोने की लंका के अधिपति थे लेकिन उनका जन्मस्थान प्रदेश के ग्रेटर बिसरख गांव में स्थित था। यही वह गांव है जहां न केवल रावण का जन्म हुआ था बल्कि रावण ने घनघोर तपस्या करके महादेव शिव को प्रसन्न कर लिया था। इसके बाद युवावस्तु में उन्होंने कुबेर से सोने की लंका को बलपूर्वक हथियाने के लिए लंका पर आक्रमण किया और अंततः लंकापति बन गये।
आपने रामायण की कथा तो सुनी होगी, जिसमें आपने भी सुना होगा कि रावण युद्ध में राम के प्रकट होने से इतना डर नहीं लगता था कि हनुमान जी के लंका में प्रवेश से डर लग गया था और हनुमान जी की पूंछ में आग लग गई थी . उसी पूंछ से हनुमान जी ने पूरे लंका में जंपकूड कर आग लगा दी थी और सोने के लंका में तबाही मचा दी थी लेकिन लगता है कि हनुमान जी का यह डर आज भी रावण को है।
रावण के गांव बिसरख में है शिवजी का मंदिर। यह वह मंदिर है जहां रावण ने भगवान शिव की आराधना करते हुए अचूक शिलालेख रखे थे और महाबलशाली बन गए थे। इस मंदिर में एक तरफ शनिदेव की भी प्राचीन मूर्तियां लगी हैं, जहां दीवारों पर रावण के चित्र बने हैं, लेकिन इसके सामने बने माता पार्वती के मंदिर में भगवान शिव, गणेश जी और भगवान शिव की मूर्तियां लगी हैं।
हनुमान जी पर चढ़ता है चोला, पढ़ता है चालीसा
बड़ा दिलचस्प डॉक्टर है इस मंदिर में हनुमान जी की भी एक बड़ी मूर्ति लगी है। इस प्रतिमा पर हर मंगलवार को चोला चढ़ाया जाता है। हनुमान जी की आराधना होती है और सुंदर कांड का पाठ होता है। खास बात यह है कि रहस्योद्घाटन में रावण की आरती नहीं गाई जाती बल्कि हनुमान जी की चालीसा का पाठ किया जाता है।
गांव की निवासी देवी दुर्गा का वर्णन है कि रावण के गांव में दुर्घटना और अनहोनी की आपदा न तो बनती है और न ही रावण का दहन किया जाता है। यहां लोग रावण के पुत्र को मानते हैं और राम को भी मानते हैं लेकिन यहां कभी-कभी रामायण का पाठ नहीं किया जाता है हालांकि लोग हनुमान चालीसा का बहुत अच्छा पाठ करते हैं। यहां हनुमान जी को चोला भी चढ़ाते हैं।
राम और रावण के कोई प्रतिमान नहीं हैं
दिल्च अस्पताल में बात तो यह है कि रावण के गांव में हनुमान जी तो हैं लेकिन कहीं भी राम की मूर्ति नहीं है। जबकि रावण की भी कोई प्रतिमा नहीं है, पूजा की जाए। सिर्फ मंदिरों की दीवारों पर रावण की जीवनगाथा की कहानियां बनी हुई हैं।
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पहले प्रकाशित : 27 अक्टूबर, 2023, 19:04 IST
