दिल्ली/विद्यार्थीकैमूर : भभुआ के अखलासपुर के पास लोध-गोपाल नामक स्टॉल पर मिलने वाला समोसा का दर्जा सबसे ज्यादा है। यहां मटर के छोले के साथ समोसा बनाया जाता है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं. साथ ही घर के लिए रसायन भी हैं। ठेले पर रोजाना करीब 300 समोसे की बिक्री होती है। स्टॉल विक्रेता अलेक्जेंडर सिंह ने बताया कि यहां अन्य वस्तुएं भी देखी जाती हैं, लेकिन यह स्टॉल समोसे के लिए प्रसिद्ध है।
इसे मटर के छोले के साथ बनाया जाता है, जो इसे रेस्ट समोसा से अलग बनाता है। छोले के साथ एक पीस समोसे की कीमत 15 रुपये ली जाती है और दो समोसे के साथ छोले की कीमत 20 रुपये ली जाती है. ऐसे लोगों की जेब पर भी लोड नहीं देखा जाता और स्वादिष्ट नाश्ता कर लेते हैं।
समोसा छोले औरले बनाने में गुणवत्ता का होना आवश्यक है
अलेक्जेंडर सिंह ने बताया कि यह दुकान दो साल से चल रही है। सुबह 8 बजे तक लग जाता है और शाम 7 बजे तक बंद हो जाता है। यहां शादी, हाईस्कूल, मेथ समेत अन्य मौकों पर भी ऑर्डर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि यहां समोसे की प्रकृति इतनी भारी नहीं है, क्योंकि यहां प्रकृति से सहमति नहीं है।
आलू से लेकर मैदा और मसाले की गुणवत्ता सबसे बेहतर रेटिंग है। उन्होंने बताया कि खड़े मसाला खुद के बाजार से खरीद कर लगाए गए हैं और आवंटित किए गए हैं। इसी तरह के खोखले के लिए मटर मंडी से बेचना है और 24 घंटे तक सिंगलटे हैं। इसके मटर को प्रोटोटाइप कर प्रोटोटाइप के सात भूनकर चोला तैयार करते हैं।
प्रतिदिन 2 हजार की हो जाती है कमाई
अलेक्जेंडर सिंह ने बताया कि नुस्खा भी काफी स्वस्थ होता है। इमली, लहसुन, हरी मिर्च और पुदीना की चटनी समोसे का स्वाद लाजवाब बनाती है। अलेक्जेंडर ने बताया कि दुकान की टाइमिंग फिक्स है, इसके बावजूद लोग समय से पहले पहुंच गए हैं। सुबह आठ बजे से लोग समोसा खाने के लिए पहुंच जाते हैं और देर शाम तक नशे में रहते हैं।
अलेक्जेंडर ने बताया कि 5 से 8 किल मटर का दैनिक आधार है। रोजाना 2 हजार की लागत आती है और 2 हजार की कमाई भी हो जाती है। भभुआ सहित आस-पास के लोग समोसे के साथ छोला प्यार से खाते हैं। यहां दोनों वास्तुशिल्प के शिल्प तैयार करते हैं।
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पहले प्रकाशित : 28 अक्टूबर, 2023, 14:28 IST
